चंडीगढ़, 31 जनवरी: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मंगलवार, 2 फरवरी को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिससे कृषि कानूनों के मुद्दे और दिल्ली में ताज़ा घटनाओं के मद्देनजऱ किसान आंदोलन पर इख्तियार किए जाने वाले अगले रास्ते के लिए आम सहमति बनाई जा सके। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह मीटिंग सुबह 11 बजे पंजाब भवन में होगी और इसमें दिल्ली में चल रहे मौजूदा किसान आंदोलन से पैदा होने वाले घटनाक्रम ख़ासकर गणतंत्र दिवस के मौके पर घटी हिंसा, सिंघू सरहद पर किसानों पर हमला और किसानों को बदनाम करने के लिए चलाई जा रही मुहिम जैसे अहम मसलों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने समूह पार्टियों को किसानों की हिमायत और पंजाब के हितों को मुख्य रखते हुए एकजुट होकर इस मीटिंग में शिरकत करने का न्योता देते हुए कहा कि कृषि कानूनों से पैदा हुआ संकट समूचे राज्य और इसके लोगों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि समूह पंजाबियों के साझे यत्नों और राज्य की सभी राजनैतिक पार्टियों के एकसाथ इस समस्या को प्रभावी ढंग से निपटने के साथ-साथ किसानों के हितों की रक्षा की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे किसान दिल्ली की सरहदों पर दो महीने से भी अधिक समय से अपनी जान कुर्बान कर रहे हैं। पुलिस द्वारा उनकी मारपीट और गुंडों द्वारा हमले किए जा रहे हैं। उनको प्राथमिक सुविधाओं से भी वंचित रख कर परेशान किया जा रहा है।’’ मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इसमें बड़ी संख्या में नु$कसान पंजाब के किसानों को बर्दाश्त करना पड़ रहा है, इसलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि सभी पार्टियाँ एक मंच पर आकर इस मसले पर साझी रणनीति बनाएं। मुख्यमंत्री ने उम्मीद ज़ाहिर की कि पंजाब, जोकि मौजूदा संकट से सबसे अधिक प्रभावित है, की समूह राजनैतिक पार्टियाँ इस समस्या का हल ढूँढने के लिए अपनी भिन्नताओं को एक तरफ़ रख देंगी, क्योंकि यह मसला हरेक पंजाबी के साथ संबंध रखता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह समय अपना घमंड रखने का नहीं बल्कि अपने राज्य और लोगों को बचाने के लिए एकजुट होने का है।’’



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