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पंजाब में वर्ष 2020 के दौरान सडक़ हादसों में होने वाली मौतों की संख्या में आई 15 प्रतिशत की गिरावट

पंजाब पुलिस राज्य की सडक़ों को सुरक्षित बनाने के लिए वचनबद्ध: डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता चंडीगढ़, 16 फरवरी:  पंजाब में वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष ...

पंजाब पुलिस राज्य की सडक़ों को सुरक्षित बनाने के लिए वचनबद्ध: डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता

चंडीगढ़, 16 फरवरी: पंजाब में वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 के दौरान सडक़ हादसों में मरने वालों की संख्या में 15 प्रतिशत और सडक़ हादसों में 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जोकि सडक़ सुरक्षा के नज़रिए से एक बड़ी उपलब्धि है।विवरणों के मुताबिक वर्ष 2020 के दौरान कुल 5194 सडक़ हादसे दर्ज किए गए, जबकि सडक़ हादसों में 3866 लोगों की जान गई। डायरैक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी), पंजाब दिनकर गुप्ता ने बताया कि चल रहे सडक़ सुरक्षा माह (18 जनवरी से 17 फरवरी, 2021) के दौरान पंजाब पुलिस द्वारा 521 सडक़ सुरक्षा कैंप और 542 सडक़ सुरक्षा सैमीनार करवाए गए हैं और इसके अलावा राज्य भर में 152 जागरूकता रैलियाँ की गई हैं, जिसके अंतर्गत स्कूल और कॉलेज के लगभग 1.33 लाख विद्यार्थी और 1.28 लाख नागरिकों को सडक़ सुरक्षा और ट्रैफिक़ नियमों के बारे में जागरूक किया गया है।उन्होंने कहा कि सडक़ सुरक्षा को बड़ी चिंता मानते हुए पंजाब पुलिस राज्य की सडक़ों को यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है।डीजीपी गुप्ता ने आगे बताया कि सडक़ सुरक्षा को संंस्थागत बनाने के लिए पटियाला जि़ले में एक पायलट प्रोजैक्ट ‘एक्सीडेंट रेज़ोल्यूशन टीम-एआरटी’ शुरू किया गया है, जिसके अंतर्गत स्टेशन हाऊस अफ़सर (एसएचओ) के नेतृत्व में टीमें अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में ब्लैक स्पॉट्स का दौरा और निरीक्षण करती हैं। पटियाला पुलिस द्वारा ऐसी 25 ए.आर.टी. तैयार की गई हैं और विशेष तौर पर पटियाला-सरहिन्द रोड पर अधिक से अधिक 20 सुधारवादी कदम उठाए गए हैं, जिससे हादसों की दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। डीजीपी ने बताया कि आवारा पशुओं के कारण होने वाली मौतों की रोकथाम के लिए पंजाब पुलिस द्वारा एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजऱ (एसओपी) तैयार किया गया है और पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं वाले ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की जा रही है। डीजीपी ने कहा कि मालवा पट्टी में ऐसे 25 ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की गई है और हादसों को रोकने के लिए आवारा पशुओं की गर्दन पर रिफलैकटिव पट्टियाँ बाँधी जाती हैं।डी.जी.पी. ने बताया कि साल 2011 से 2020 जो कि सडक़ सुरक्षा का एक दशक घोषित किया गया था, के दौरान पंजाब में सडक़ हादसों में होने वाली मौतों में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है, जोकि पंजाब पुलिस के लिए गर्व वाली बात है। जि़क्रयोग्य है कि इसी समय के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सडक़ हादसों में होने वाली मौतों में कुल 10 प्रतिशत वृद्धि हुई है। ट्रैफिक़ सलाहकार नवदीप असीजा ने बताया कि रोड एक्सीडेंट डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम का विश्लेषण करने के बाद पंजाब में 391 ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की गई है, जिनमें से 100 ब्लैक स्पॉट्स को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा पहले ही दुरुस्त कर दिया गया है, जबकि लोक निर्माण विभाग (पी.डब्ल्यू.डी.) द्वारा 31 ब्लैक स्पॉट्स को दुरुस्त किया जा रहा है।एडीजीपी ट्रैफिक़ शरद सत्य चौहान ने बताया कि ट्रैफिक़ विंग ने मोहाली में अपनी किस्म का पहला रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक़ रिसर्च सैंटर स्थापित किया है, जो राज्य में सडक़ हादसों में होने वाली मौतों पर काबू पाने के लिए उचित हल ढूँढने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजैंस और मशीन लर्निंग जैसे साईंटिफिक टूल्ज़ का प्रयोग करता है। उन्होंने कहा कि सडक़ हादसों की वैज्ञानिक जांच को मज़बूत करने के लिए पंजाब पुलिस द्वारा इस केंद्र में एक ‘‘क्रैश इन्वेस्टिगेशन व्हीकल’’ भी तैयार किया गया है।  


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