भारत में गर्भवति महिलाओं पर भी नहीं होगा ग्रहण का कोई असर : पं. जोशी

श्री मुक्तसर साहिब, 06 जून  : इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून को लगेगा, जो भारत में आंशिक रु प से नजर आएगा। इस सूर्य ग्रहण का भारत में सूतक काल मान्य नहीं है। अमेरिका के उत्तरी भाग, यूरोप और एशिया में भी आंशिक ग्रहण ही रहेगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण उत्तरी कनाडा, ग्रीनलैंड और रूस में होगा। साल का पहला ग्रस्तास्त-स्वल्पग्रास ये सूर्य ग्रहण दोपहर 1:42 मिनट से शुरू होकर शाम के 6:41 मिनट तक रहेगा। कंकण-प्रारंम्भ अपराह्न-3-20 बजे और ग्रहण का मध्य काल शाम 4:12 बजे होगा। यह जानकारी सनातन धर्म प्रचारक प्रसिद्ध विद्वान ब्रह्मऋ षि पं. पूरन चंद्र जोशी ने गांधी नगर में आयोजित कार्यक्र म के दौरान दी। उन्होंने कहा कि ये कंकण सूर्य ग्रहण यूरोप के अधिकतर देशों, दक्षिणी इटली, दक्षिणी रोमानिया, सर्बिया, ग्रीस को छोड़कर, उत्तरी एशिया अधिकतर चीन, दक्षिणी चीन, नेपाल को छोड़कर, उज्रबेकिस्तान, कजाकिस्तान,मंगोलिया,रूस,उत्तरी अमेरिका,पूर्वी अमेरिका, वाशिगटन,अधिकतर कनाडा, ओन्टारिओ, अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। भारत में न दिखाई देने के कारण इस ग्रहण का कोई सूतक या कोई बुरा प्रभाव अपने देश में बिल्कुल भी नहीं पढेगा। मंन्दिर खुले रहेगे। तथा गर्भवती स्त्रियों पर भी कोई बुरा प्रभाव नहीं पडेगा। पं. जोशी के अनुसार 10 जून को लगने वाला यह पूर्ण सूर्य ग्रहण है जिसमें चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को ढक लेगा। ऐसे में केवल सूर्य की बाहरी परत ही दिखाई देगी। ग्रहण में सूर्य के लगभग 94 फीसदी भाग को चंद्रमा ग्रस लेगा यानी कि ग्रहण लगा देगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण होने की वजह से दिन में अंधेरा छा जाएगा। भारत में ये ग्रहण आंशिक रूप से ही होगा। इसलिए ग्रहण काल मान्य नहीं होगा। हालांकि, यह ग्रहण भी भारत में नहीं दिखेगा। इसलिए यह भी केवल खगोलीय नजरिये से खास रहेगा। पिछले साल भी ऐसी स्थिति बनी थी जब 15 दिनों में दो ग्रहण हुए थे। लेकिन देश में नहीं दिखने से इनका अशुभ असर भी नहीं पड़ा था।

तीन तरह के होते हैं सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण तीन तरह के होते हैं. पहला है- पूर्ण सूर्य ग्रहण। पूर्ण सूर्यग्रहण को धरती के एक छोटे से हिस्से से ही देखा जा सकता है। इसमें पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य बिल्कुल एक सीध में होते हैं। जब चंद्रमा की छाया पृथ्वी को ढंकती है, उस वक्त पूर्ण सूर्य ग्रहण वही लोग देख सकते हैं, जो चंद्रमा की छाया के केंद्र में हों। दूसरे तरह का सूर्यग्रहण होता है- आंशिक सूर्य ग्रहण। इस तरह के सूर्य ग्रहण में चंद्रमा की छाया सूरज के बहुत छोटे हिस्से पर पड़ती है। तीसरे तरह का सूर्यग्रहण होता है सालाना सूर्यग्रहण। इसमें चंद्रमा धरती से सबसे अधिक दूरी पर रहता है। इसलिए ये छोटा दिखता है। इस स्थिति में चंद्रमा, सूरज को पूरी तरह से नहीं ढंक पाता। ऐसा लगता है कि किसी बड़े से गोले ने सूरज को ढंक रखा है। इस स्थिति में एक चमकीला रिंग बनता है, जिसे रिंग ऑफ फायर कहते हैं।


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