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यमुना ने बांधी थी यमराज को राखी, यमराज ने दिया अमरता का वरदानः पं.जोशी
राजसूय यज्ञ के समय भगवान कृष्ण को द्रौपदी ने रक्षा सूत्र के रुप में बांधा था आंचल का टुकड़ा
तभी से चली आ रही रक्षाबंधन मनाने की परंपरा

श्री मुक्तसर साहिब
, 20
अगस्त : रक्षाबंधन का त्योहार इस बार 22 अगस्त ( रविवार) को मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार राखी हर साल श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को बांधी जाती है। हिन्दू धर्म में इस त्योहार का विशेष महत्व होता है। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन का त्योहार सदियों से चला आ रहा है। ये विचार सनातन धर्म प्रचारक पं. पूरन चंद्र जोशी ने गांधी नगर में रक्षाबंधन पर्व के बारे में जानकारी देते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि यमराज की बहन यमुना ने उनकी कलाई में राखी बांधी थी जिसके बदले यमराज ने यमुना को अमरता का वरदान दिया था। पंचांग के अनुसार भद्रा काल का विचार किया जाता है। हालांकि इस दिन भद्राकाल
नहीं है। भद्राकाल के अलावा राहु काल में भी राखी का विचार किया जाता है।
रक्षाबंधन मुहूर्त 2021
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - 21 अगस्त की शाम 03:45 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्त - 22 अगस्त की शाम 05:58 मिनट तक
शुभ समय - 22 अगस्त रविवार सुबह 05:50 बजे से शाम 06:03 बजे तक
रक्षा बंधन के लिए दोपहर का उत्तम समय - 22 अगस्त को 01:44 बजे से 04:23 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:04 से 12:58 मिनट तक
अमृत काल - सुबह 09:34 से 11:07 तक
ब्रह्म मुहूर्त - 04:33 से 05:21 तक
रक्षाबंधन के दिन सुबह-सुबह उठकर स्नान करें और शुद्ध कपड़े पहनें। इसके बाद घर को साफ करें और चावल के आटे का चौक पूरकर मिट्टी के छोटे से घड़े की स्थापना करें। चावल, कच्चे सूत का कपड़ा, सरसों, रोली को एकसाथ मिलाएं। फिर पूजा की थाली तैयार कर दीप जलाएं। थाली में मिठाई रखें। इसके बाद भाई को पीढ़े पर बिठाएं। अगर पीढ़ा आम की लकड़ी का बना हो तो सर्वश्रेष्ठ है। रक्षा सूत्र बांधते वक्त भाई को पूर्व दिशा की ओर बिठाएं। वहीं भाई को तिलक लगाते समय बहन का मुंह उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इसके बाद भाई के माथ पर टीका लगाकर दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें फिर उसको मिठाई खिलाएं। अगर बहन बड़ी हो तो छोटे भाई को आशीर्वाद दें और छोटी हो तो बड़े भाई को प्रणाम करें।
रक्षाबंधन पर्व का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा बलि को वचन देकर जब विष्णु पाताल जा पहुंचे तो श्रावण माह की पूर्णिमा को ही लक्ष्मी ने रक्षा सूत्र बांधकर विष्णु को मांगा था। एक अन्य कथा के अनुसार राजसूय यज्ञ के समय भगवान कृष्ण को द्रौपदी ने रक्षा सूत्र के रूप में अपने आंचल का टुकड़ा बांधा था। इसी के बाद से बहनों द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा शुरू हो गई। रक्षाबंधन के दिन ब्राहमणों द्वारा अपने यजमानों को राखी बांधकर उनकी मंगलकामना की जाती है। इस दिन विद्या आरंभ करना भी शुभ माना जाता है।

 

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