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Tokyo Olympics - छठे नंबर पर रही कमलप्रीत कौर, डिस्कस थ्रो में सोना लाने से चूकी,

 -लेकिन अब तक का देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा-

-जिला मुक्तसर के गांव कबरवाला की है कमलप्रीत-

श्री मुक्तसर साहिब -जिला श्री मुक्तसर साहिब के छोटे से गांव कबर वाला की रहने वाली कमलप्रीत कौर ने टोक्यो ओलंपिक मैं खेलते हुए डिस्कस थ्रो में चाहे सोना तो नहीं ला पाई लेकिन भारतवर्ष का अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन कर छठे स्थान पर रही।


उसकी प्राप्ति पर गांव, जिला अथवा पंजाब ही नहीं पूरा देश गौरवान्वित हैं। उसकी प्राप्ति पर जहां समाजसेवी से लेकर सियासत तक लोग सोशल साइटों पर पोस्ट डाल कर खुशी जता रहे हैं वही पैतृक गांव में भी खुशी की लहर देखने को मिल रही है।    कमलप्रीत के पैतृक गांव में बधाईयां देने आने वालों का तांता लगा रहा। 

गौरतलब है कि मलोट के गांव कबरवाला की रहने वाले कमलप्रीत कौर का जन्म 04 मार्च 1996 को हुआ था। उसने अपनी दसवीं तक की पढ़ाई कबरवाला के नजदीकी गांव कटियांवाली के बाबा ईशर सिंह पब्लिक स्कूल में की। स्कूल की डीपी अध्यापक ने कमलप्रीत की प्रतिभा को पहचाना और खेलों में आगे आने को प्रोत्साहित किया। इस दौरान कमलप्रीत ने डिस्कस थ्रो जोन लेवस तथा स्टेट लेवल तक खेला। जिसके चलते कमलप्रीत का खेलों की ओर रुझान हो गया। अपनी ट्रेनिंग के लिए उसने गांव बादल के दशमेश स्कूल को चुना। जहां पर अपनी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की और साथ ही साथ खेलों को जारी रखा। शिक्षक प्रितपाल कौर तथा उनके पति प्रेमसुख ने कमलप्रीत का हौसला बढ़ाया और खेल प्रतिभा निखारने में मदद की। इसके बाद वहां पर शिक्षक राखी त्यागी की देख-रेख में कमलप्रीत ने अपने खेल को और निखारा और पहली बार अंडर 19 में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इसके बाद कमलप्रीत कौर ने पंजाब यूनिवर्सिटी ब्रांच धूरी से अगली पढ़ाई पूरी की। जहां पर उसने इंटर कॉलेज गेम में रिकॉर्ड बनाकर अपना नाम रोशन किया। बीए की पढ़ाई के बाद उसे रेलवे में जूनियन क्लर्क के तौर पर पटियाला में नौकरी मिल गई। दो वर्ष बाद उसे सीनियर क्लर्क बनाया गया। जहां पर हरियाणा के शक्ति सिंह के संपर्क में आई। शक्ति सिंह ओलंपिक में गोल्ड मेडलिस्ट थे। उनकी मदद से कमलप्रीत ने ओलंपिक की तैयारी शुरु कर दी।

बता दें कि ओलंपिक में जाने से पूर्व कमलप्रीत कौर को ओलंपिक की तैयारी के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से 10 लाख रुपए तथा खेल मंत्री राणा सिंह सोढी की तरफ से 10 लाख रुपए की सहायता राशि भी मिल चुकी है।

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