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कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने हरियाणा के किसान समर्थकी कदमों संबंधी खट्टर के दावों को खारिज किया

 हरियाणा सरकार द्वारा किसानों पर किये अमानवीय अत्याचार पर पर्दा डालने के लिए इसको हरियाणा के मुख्यमंत्री की कोशिश करार दिया

कहा, आपके बेतरतीबी आंकड़ों की उदाहरण से आपकी सरकार किसानों के विरुद्ध की गई ज्यादतियों से मुक्त नहीं हो सकेगी’

चंडीगढ़, 31 अगस्त: हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा टवीटों के द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री से किसानों के कल्याण के लिए उठाये गये कदमों संबंधी पूछे सवालों का करारा जवाब देते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मंगलवार को एम. एल. खट्टर के दावों को खारिज किया और इसको भाजपा नेता की तरफ से अपनी सरकार की तरफ से किसानों पर किये गए अमानवीय अत्याचार पर पर्दा डालने की भद्दी कोशिश करार दिया।
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कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा की खट्टर के दावे और सवाल और कुछ भी नहीं हैं सिर्फ हरियाणा सरकार की तरफ से शांतमायी प्रदर्शन कर रहे किसानों पर हाल ही में किये लगातार हिंसक हमलों के कारण हो रही देशव्यापी आलोचना से बचने के लिए बचाव का एक घटिया ढंग है। हरियाणा में किसानों पर किये गए अंधाधुन्ध लाठीचार्ज के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री की तरफ से दिए जा रहे अलग-अलग बयानों ने एक बार भाजपा की किसान विरोधी मानसिकता का पूरी तरह से स्पष्ट तौर पर पर्दाफाश कर दिया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा की किसानों पर बिना किसी उकसाने और नाजायज हमले के लिए माफी मांगने की बजाय खट्टर बेशर्मी से पुलिस की कार्यवाही का बचाव कर रहे थे। यहां तक की करनाल के एस. डी. एम. की पुलिस को दी हैरानजनक हिदायतों को भी सही साबित करने की कोशिश की गई जबकि सारी दुनिया ने इसको देखा और इसकी निंदा की।
हरियाणा के मुख्यमंत्री की तरफ से यह कहना की हरियाणा सरकार ने पंजाब सरकार के मुकाबले किसानों के लिए ज्यादा किया है, के घिनौने दावों को नकारते हुये करते कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने खट्टर को पूछा, ’’अगर ऐसा है तो आपके अपने राज्य के किसान आपके और आपकी पार्टी ( भाजपा) से नाराज क्यों हैं?’’ कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा की भारत के लोगों को यह यकीन दिलाने में असफल रहने के बाद की यह पंजाब और इसके किसान हैं जो दिल्ली की सरहदों पर खेत कानूनों के विरुद्ध लंबे समय से आंदोलन के लिए जिम्मेदार थे, अब खट्टर झूठे और अतिकथनी वाले दावों का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा की इन बेतरतीबी आंकड़ों की उदाहरण देने से हरियाणा सरकार किसानों के विरुद्ध की ज्यादतियों से मुक्त नहीं हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने खट्टर के दावों का जवाब देते हुये कहा की 2017 में पिछली अकाली-भाजपा सरकार की तरफ से उनकी सरकार को विरासत में मिली राज्य के डावांडोल आर्थिकता के बावजूद कांग्रेस सरकार की तरफ से शुरू की गई किसान समर्थकी पहलकदमियां और योजनाओं की सूची के मुकाबले हरियाणा किसानों के कल्याण के कामों में पंजाब से कोसों दूर है बल्कि खट्टर सरकार ने किसानों का लगातार नुकसान ही किया है।
खट्टर के किसान समर्थकीय सरकार चलाने के बेतुके दावों को नकारते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा, ’’आपकी पार्टी ने हमारे पास यहां तक की हमारे कर्मचारियों को वेतन देने लायक पैसा भी नहीं छोड़ा और फिर भी हम सफलतापूर्वक 5 64, 143 छोटे और दर्मियाने किसानों का 4624. 38 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया और 2.85 लाख भूमि रहित किसानों और मजदूरों की कर्ज माफी के लिए 590 करोड़ रुपए और मंजूर किये गए।’’
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा की हरियाणा अपने किसानों को बिजली सब्सिडी के लिए एक पैसा भी नहीं देता जबकि पंजाब सरकार की तरफ से किसानों की खेती मोटरों के लिए हर साल 7200 करोड़ रुपए ( लगभग 17000 रुपए प्रति हेक्टेयर) बिजली सब्सिडी के रूप में दिए जा रहे हैं।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा पंजाब न्युनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं, धान और कपास जैसी मुख्य फसलों की खरीद के मामले में ना सिर्फ देश में अग्रणी रहा है, बल्कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य निगम की गलत नीतियों के दर्मियान निर्विघ्न खरीद को सुनिश्चित बनाने के लिए किसानों को अतिरिक्त सहायता भी प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा की कांग्रेस सरकार ने 2020-21 में गेहूं और धान की खरीद पर 62,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसके अलावा खरीफ की फसल और रबी सीज़न में क्रमवार 1100 करोड़ रुपए और 900 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च किए गए हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा की फसलीय विभिन्नता के लिए प्रोत्साहन देने के लिए पंजाब सरकार ने बहुत से फंड मुहैया करवाए हैं। कपास उत्पादक किसानों को 9. 95 करोड़, मक्का उत्पादकों को 4.06 करोड़ रुपए पिछले तीन सालों में वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए दिए हैं। उन्होंने कहा की मक्का के लिए यह प्रति हेक्टेयर 7690 रुपए और 7697 रुपए प्रति किसान के हिसाब से काम करता है। कपास के लिए 4150 रुपए प्रति हेक्टेयर और 4600 रुपए प्रति किसान के हिसाब से काम करता है। मुख्यमंत्री ने कहा की ‘पानी बचाओ, पैसा कमाओ’ स्कीम के अंतर्गत पंजाब सरकार पानी का संरक्षण करने की विधियां अपनाने के साथ-साथ धान की बुवाई और वैकल्पिक फसलों बीज के बिजली की बचत कर रहे किसानों को बिजली का 4 रुपए प्रति यूनिट मुहैया करवा रही है, जो किसान हैं।
खट्टर के इस गर्व के दावे की उनकी सरकार भुगतान में देरी के लिए 12 प्रतिशत ब्याज दे रही है, की खिल्ली उड़ाते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा की हरियाणा के बिल्कुल उलट पंजाब सरकार 72 घंटों के अंदर- अंदर किसान के खातों में सीधा भुगतान कर रही है, जिससे ब्याज देने की जरूरत ही नहीं रहती। उन्होंने खट्टर को जवाब देते हुए कहा, ‘‘यह आपकी सरकार की खरीद प्रक्रिया का ढीला प्रबंध और किसानों के प्रति आपकी उदासीनता भरा रवैया है जिस कारण भुगतान में देरी हो रही है।’’
तकनीक आधारित धान की सीधी बुवाई को अपनाने वाले किसानों को 5000 रुपए प्रति एकड़ के प्रोत्साहन सम्बन्धी खट्टर के दावों को रद्द करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा की हरियाणा के 1.00 लाख हेक्टेयर के मुकाबले पंजाब में 40 प्रतिशत सब्सिडी ( या 900 मशीनों पर 16000 रुपए) के साथ मौजूदा समय में डी.एस.आर. तकनीक के अधीन 6.01 लाख हेक्टेयर है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने खट्टर को पूछा, ‘‘पराली प्रबंधन के लिए यह 1000 रुपए प्रति एकड़ क्या है जिसके बारे में आप दावा कर रहे हो? हम 2500 रुपए प्रति एकड़ देते हैं, जोकि वित्तीय वर्श 2020 में 19.93 करोड़ रुपए था, जिससे 31231 किसानों को लाभ हुआ। तो इस समय के दौरान आपकी सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए वास्तव में कितना खर्च किया?’’
खट्टर की इस टिप्पनी को हास्यास्पद बताते हुए की किसान आंदोलन के बाद पंजाब को हरियाणा के गन्ने के न्युनतम समर्थन मूल्य की बराबरी करने की जरूरत है, पंजाब के मुख्यमंत्री ने अपने हरियाणा के समकक्ष को कहा की वह कोई भी बात करन से पहले तथ्यों की जाँच कर लें, उन्होंने कहा की पंजाब का न्युनतम समर्थन मूल्य हरियाणा के बराबर नहीं है बल्कि इससे ज्यादा है और पिड़ायी सीज़न 2021-22 के लिए गन्ने का भाव 360 रुपए प्रति क्विंटल तय करने से पंजाब सभी राज्यों में पहले स्थान पर है। उन्होंने आगे कहा की वास्तव में पंजाब सरकार हमेशा ही गन्ना उत्पादकों को भारत सरकार द्वारा निर्धारित एफ.आर.पी. से अधिक कीमत देती आ रही है और एम.एस.पी. में भी बहुत पहले वृद्धि कर चुकी होती यदि पंजाब की अर्थव्यवस्था को तबाह करने के लिए खट्टर की पार्टी ने अकालियों के साथ 10 सालों से मिलीभुगत ना की होती।
बागबानी किसानों को प्रोत्साहन देने संबंधी खट्टर के अस्पष्ट बयान का हवाला देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा की उनकी सरकार ने किन्नू फसलों की मार्केट फीस ना सिर्फ 0.5 प्रतिशत तक घटा दी है बल्कि मानक जानकारी और सेवाएं प्रदान करके उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए 8 वस्तु विशेष एस्टेट ( नींबू प्रजाति के लिए 5, लीची के लिए 1, नाशपाती के लिए 1, अमरूद के लिए 1 भी स्थापित किए हैं।
लघु सिंचाई के बारे में पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा की उनकी सरकार बहुत ही जरूरतमंद और कमजोर छोटे/सीमांत/महिलाओं/अनुसूचित जातियों के किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी और दूसरे किसानों को 80 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान कर रही है।

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