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पराली के प्रबंधन के लिए खरीदी गईं कृषि मशीनों की की जाएगी फिजिकल वैरीफिकेशन

 चंडीगढ़, 31 अक्टूबर:

पंजाब के कृषि मंत्री स. रणदीप  सिंह नाभा ने सभी किसानों, सहकारी सभाओं और पंचायतों, जिन्होंने मशीनों की खरीद के लिए मंज़ूरी प्राप्त की है, से अपील की है कि वह 1.11.2021 को सभी मशीनों की भौतिक तस्दीक करने के लिए सभी ब्लॉक कृषि अफ़सरों के दफ़्तरों या निर्धारित स्थानों पर लाएं। मशीनों की तस्दीक होने के बाद सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जायेगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिया कि स्कीम के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसानों या सहकारी संस्थाओं के बैंक खातों में सब्सिडी की बाँट की जायेगी।

पराली के प्रबंधन के लिए खरीदी गईं कृषि मशीनों की की जाएगी फिजिकल वैरीफिकेशन

उन्होंने अनुसूचित जातियों, पंचायतों और सहकारी सभाओं के किसानों को धान के अवशेष प्रबंधन मशीनों के लिए आवेदन पत्र विभाग के पोर्टल agrimachinerypb.com 
के द्वारा जमा करवाने की भी सलाह दी। किसी भी मुश्किल की स्थिति में विभाग के अधिकारियों द्वारा पोर्टल पर आवेदन जमा कराने में मदद की जायेगी।

छोटे, मध्यम और अनुसूचित जाति के किसानों को बिना किराए के मशीनें मुहैया करवाने के लिए पंचायतों और सहकारी संस्थाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

किसानों को धान की पराली न जलाने की सलाह दी गई है और राज्य में सहकारी सभाओं और पंचायतों और अन्य कस्टम हायरिंग सैंटरों को उपलब्ध करवाई गई मशीनों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। किसान बायो डीकम्पोजऱ, गेहूँ की सीधी बिजाई जैसे अन्य विकल्पों का प्रयोग कर सकते हैं।

स. नाभा ने कहा कि धान की कटाई के सीजन के दौरान किसानों को कृषि मशीनरी मुहैया करवाने के लिए फ़सलीय अवशेष प्रबंधन (सी.आर.एम.) स्कीम के अंतर्गत पंजाब कृषि और किसान कल्याण विभाग ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए पी.ए.सी.एस., पंचायतों, किसान सोसायटियों के अधीन रजिस्टर्ड सी.एच.सीज़ और व्यक्तिगत किसानों को 31970 खेती मशीनें/उपकरण खरीदने के लिए अब तक 10297 अजिऱ्यों को मंजूरी दी है। इसमें व्यक्तिगत किसानों के लिए 10023; सीएचसी के लिए 15498 मशीनें; पंचायतों के लिए 5543, पीएसीएस के लिए 906 मशीनें शामिल हैं।

सीआरएम स्कीम के अंतर्गत, राज्य सरकार ने किसानों को सब्सिडी पर अत्याधुनिक मशीनें प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें पराली के खेत में प्रबंधन के लिए सूपर एसएमएस, सूपर सीडर, हैपी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर/शरेडर/मल्चर, हाइड्रोलिक रिवरसीबल मोल्ड बोर्ड हल और ज़ीरो टिल ड्रिल और पराली के खेत से बाहर प्रबंधन के लिए बेलर और रैक मशीनें शामिल हैं।

उन्होंनेे आगे बताया कि पिछले तीन सालों के दौरान किसानों को 76,626 धान की पराली प्रबंधन मशीनें सब्सिडी पर दीं गई हैं। मंत्री ने आगे बताया कि पटियाला, संगरूर, बरनाला, बठिंडा, फिऱोज़पुर, श्री मुक्तसर साहिब, तरनतारन, मोगा, लुधियाना और मानसा को भी हॉटस्पॉट जिलों के तौर पर पहचाना गया है, जहाँ पिछले समय के दौरान धान की पराली को आग लगाने के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।

उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की तरफ से पराली जलाने के विरुद्ध जागरूकता के लिए गाँवों में प्रशिक्षण कैंप, स्कूली बच्चों में अलग-अलग तरह के मुकाबले; मशीनों का बेहतर प्रयोग के लिए प्रशिक्षण; प्रमुख स्थानों पर दीवारों पर अच्छे संदेश लगाए गए हैं। हरेक जि़ले के दूर-दूर तक संदेश पहुँचाने के लिए विशेष डिस्पले वैनों का प्रयोग किया जा रहा है।

स. नाभा ने बताया कि राज्य सरकार ने इन जिलों में लागूकरण और रेगुलेटरी उपायों के लिए एक विशेष टास्क फोर्स भी तैनात की है, जिससे धान की कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने को यकीनी बनाया जा सके। किसानों को सी.एच.सीज़ से प्रयोग के लिए मशीनें लेने के लिए नोडल अधिकारियों की सहायता लेने और पंजाब रिमोर्ट सेंसिंग सैंटर के साथ विकसित आई-खेत मशीन ऐप का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

मंत्री ने आगे कहा कि सीएचसी और व्यक्तिगत किसानों द्वारा खरीदी गई सभी मशीनों की आई-खेत मशीन के साथ मैपिंग की जाती है और कोई भी अपने आस-पास 5 से 25 किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध मशीनों के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है।

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