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अगले सीजन मालवा क्षेत्र की कपास, गुलाबी सूंडी से होगी मुक्त - रणदीप नाभा

 गुलाबी सूंडी के हमले को रोकने के लिए ‘मेटिंग डिसरपशन टेक्नोलोजी ’ का किया जायेगा प्रयोग


कृषि विभाग के अधिकारियों को इस तकनीक सम्बन्धी रिपोर्ट जल्द तैयार करने के लिए कहा

अगले सीजन मालवा क्षेत्र की कपास, गुलाबी सूंडी से होगी मुक्त - रणदीप नाभा

चंडीगढ़, 6 अक्तूबरः पंजाब सरकार मालवा कपास पट्टी में गुलाबी सूंडी की समस्या से निपटने के लिए बहुत गंभीर है। अधिकारियों और माहिरों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को संबोधन करते हुये कृषि मंत्री पंजाब, स. रणदीप सिंह नाभा ने आज कहा कि कपास की फ़सल के लिए अगले सीजन से गुलाबी सूंडी से निपटने के लिए “मेटिंग डिसरपशन टेक्नोलोजी’’ इस्तेमाल की जायेगी। मालवा क्षेत्र की बिजी11 कपास पर गुलाबी सूंडी के हमले सम्बन्धी घटनाएँ सामने आईं थीं, जिसने फसलों के उत्पादन पर बुरा प्रभाव डाला। पंजाब में कपास की काश्त करने वाले किसानों की मौजूदा स्थिति गुलाबी सूंडी के कारण बहुत गंभीर है। बहुत से किसानों ने फ़सल नष्ट कर दी है और सरकार से मुआवज़े की माँग कर रहे हैं। विशेष गिरदावरी संबंधी रिपोर्ट जल्द ही आने की उम्मीद है और रिपोर्ट तैयार होने के बाद सरकार किसानों को मुआवज़ा देगी। इस दौरान अधिकारी एक रिपोर्ट तैयार करेंगे कि इस तकनीक को पंजाब में कैसे पेश किया जाये। कृषि मंत्री ने आज विभाग के सभी अधिकारियों को हिदायत की कि वह ‘मेटिंग डिसरपशन टेक्नोलोजी’ इस्तेमाल की जाये, जो फसलों की सुरक्षा में गोल्ड सटैंडर्ड मानी जाती है और पश्चिमी देशों में मशहूर है और सालों से अंगूर और सेब जैसी विशेष फसलों में इस्तेमाल की जा रही है। पिछले 4 सालों में राज्य कृषि यूनिवर्सिटियां और किसान के साथ इस तकनीक सम्बन्धी कई परीक्षण (तजुर्बे) किये गये हैं जिसके भारत के कई राज्यों में महत्वपूर्ण नतीजे सामने आए हैं। पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी ने भी इस सम्बन्धित तजुर्बे किये हैं और इससे किसानों को महत्वपूर्ण लाभ हुए हैं। स. नाभा ने कहा कि विभाग की तरफ से पंजाब में 2 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में गुलाबी सूंडी का क्षेत्र व्यापक प्रबंधन करने और किसानों को बड़ी राहत देने का प्रस्ताव है। यह तकनीक नो-पंप नो-स्प्रे के साथ सम्बन्धित है और उत्पाद एक पेस्ट के रूप में है जिसको किसान की तरफ से 30 दिनों के अंतराल पर 3 बार इस्तेमाल करना होता है। उत्पाद एक ग्रीन लेबल है और वातावरण, पौधे, किसानों और मिट्टी पर इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं है। इस तकनीक संबंधी पेशकारी देते हुए डा मारकंडेया गोरांतला, जिन्होंने जीव विज्ञान और रासायन इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्रीयाँ, फंक्शनल जीनोमिकस राइस में पीएचडी की है, ने कहा कि यह तकनीक पंजाब के किसानों के लिए खुशियाँ लायेगी, जो दुनिया भर के किसान फायदा ले रहे हैं। इस मौके पर दूसरों के इलावा स. लाल सिंह चेयरमैन मंडी बोर्ड, श्री डी. के तिवाड़ी वित्त कमिशनर, श्री दिलराज सिंह कृषि सचिव, श्री रवि भगत सचिव मंडी बोर्ड, श्री राहुल गुप्ता पीसीएस, श्री हर्षइन्दर बराड़ जेडी मंडी बोर्ड, डायरैक्टर कृषि श्री सुखदेव सिंह सिद्धू, कृषि कमिशनर और पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी के माहिर शामिल थे।

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