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दीवाली पर बन रहा इस बार दुर्लभ संयोगः पं. जोशी

 चार ग्रह एक ही राशि में होंगे विराजमान

श्री मुक्तसर साहिब ;  दीपावली इस बार 4 नवंम्बर वीरवार को आ रही है। दीवाली कार्तिक मास का प्रमुख पर्व है। इस दिन लक्ष्मी जी की विशेष पूजा की जाती है। दीवाली पर लक्ष्मी पूजन को महत्वपूर्ण माना गया है। ये पर्व लक्ष्मी जी को समर्पित है। इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक लक्ष्मी जी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। दीवाली की रात शुभ मुहूर्त में पूजा करने से लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ये जानकारी सनातन धर्म प्रचारक प्रसिद्ध विद्वान ब्रह्मऋषि पं. पूरन चंद्र जोशी ने गांधी नगर में आयोजित कार्यक्रम दौरान दी। उन्होंने कहा कि कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन दीवाली का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा का विधान है। इस बार दीवाली पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस संयोग में ही दिवाली मनाई जाएगी। इस साल चार ग्रह एक ही राशि में विराजमान होने के कारण ये दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस संयोग को शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इस संयोग में दीवाली पूजन करने से शुभ परिणाम सामने आते हैं । इस साल दीवाली पर सूर्य, मंगल, बुध और चंद्रमा एक ही राशि पर विराजमान होंगे। माना जा रहा है कि तुला राशि में इन चारों ग्रहों के रहने से शुभ परिणाम देखने को मिलेंगे। बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा, मंगल को ग्रहों का सेनापति, बुध को ग्रहों का राजकुमार और चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। तुला राशि में एक साथ सूर्य, मंगल, बुध और चंद्रमा होने से जातक को शुभ संकेत मिल सकते हैं। इससे धन- लाभ होने के संभावना रहती है। इसके साथ ही, नौकरी और व्यापार में तरक्की के योग बन सकते हैं। साथ ही मान- सम्मान और पद- प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होगी। पं. जोशी के अनुसार दीवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक अमावस्या 4 नवंबर 2021 को है। इस दिन चंद्रमा का गोचर तुला राशि में होगा। अमावस्या तिथि का प्रारम्भ: 4 नवंबर 2021 को प्रात: 06:03 बजे से.अमावस्या तिथि का समापन: 5 नवंबर 2021 को प्रात: 02:44 बजे तक है। दीपावली को दिन में-प्रातः 6-50 बजे से प्रातः 8-10 बजे तक शुभ का चौघड़िया,,प्रातः-10-50 बजे से दोपहर-2-51 बजे तक अच्छा समय है क्योकि इस बीच --चर /लाभ/अमृत के शुभ चौघड़िये हैं। उसके बाद सांम-4-11 बजे से सांम-5-32 बजे तक फिर से शुभ का चौघड़िया है।

लक्ष्मी पूजन   का विशेष-मुहूर्त

गुरुवार, शाम 06 बजकर 09 मिनट से रात्रि 08 बजकर 20 मिनट

प्रदोष काल: सांम-5:34: बजे से रात-8--10 बजे तक,

वृषभ काल: सांम-6--10 बजे से रात-8-06 बजे तक

निशीथ काल- में आप सिर्फ चर का चौघड़िया सिर्फ  रात-8-52 बजे तक ही शुभ रहेगा, उसके बाद रोग-और काल का चौघड़िया जो रात-12-11 बजे तक है।पूजन के लिए शुभ नहीं हैं। महाॅ निशीथ काल का समय है रात -1-51 बजे तक,इस बीच रात 12-11 बजे से रात-1-52 बजे तक लाभ का चौघड़िया बहुत शुभ है। हिंदू धर्म में दिवाली के त्योहार का विशेष महत्व है।

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