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‘आप’ के नेतृत्व वाले बाहरी लोग ख़ुद को जनता की आवाज़ के तौर पर पेश करने के लिए उतावले - चन्नी

 कहा, दिल्ली के नेता बसतीवादियों की तरह व्यवहार कर रहे

सुखबीर बादल और मजीठिया ने पार्टी की 100 साल पुरानी विरासत को कलंकित किया

कांग्रेस में रजवाड़ा शाही का अंत

‘आप’ के नेतृत्व वाले बाहरी लोग ख़ुद को जनता की आवाज़ के तौर पर पेश करने के लिए उतावले - चन्नी

संगरूर, 14 दिसंबरः

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आज पंजाब की राजनीति में बाहरी लोगों को खड़ा करने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) की सख़्त आलोचना की, जिनको पंजाब और इसके सांस्कृतिक मूल्यों संबंधी बिल्कुल भी जानकारी नहीं है परन्तु वह अपने आप को राज्य के लोगों की आवाज़ के तौर पर पेश करने के लिए काफ़ी उतावले हैं।
‘आप’ की दिल्ली लीडरशिप पर बसतीवादी शक्ति की तरह व्यवहार करने के लिए हमला करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पोस्टरों और फ्लैकसों पर भी पार्टी की पंजाब इकाई के नेताओं की तस्वीरें नहीं इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनके पंजाब को अपने अधीन करने के अपवित्र मंसूबे स्पष्ट हो जाते हैं।
भगवंत मान को अप्रत्यक्ष तौर पर निशाने पर लेते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि चुटकुले सुनाना लोगों की निःस्वार्थ सेवा करने की अपेक्षा बिल्कुल अलग चीज़ है और विकास सिर्फ़ बाहर के लोगों के साथ आटो-रिक्शा में आनंद मान कर नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री आज यहाँ गाँव देह कलां और घाबदां में श्री सीमिंट लिमटिड संगरूर प्रोजैक्ट और मैडीकल कालेज के नींव पत्थर रखने के मौके पर विशाल रैली को संबोधन कर रहे थे।
शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की तरफ से गरीब लोगों को आटा दाल जैसे उपायों के साथ लुभाने के लिए आलोचना करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका एजेंडा गरीबों को मानक शिक्षा और स्वास्थ्य के मौके प्रदान करके समर्थ बनाना है।
अकाली दल पर निशाना साधते हुये चन्नी ने कहा कि अकाली दल जैसी 100 साल पुरानी पार्टी को बादलों और बिक्रम सिंह मजीठिया ने नशे, बेअदबियों और भ्रष्ट कार्यवाहियों से कलंकित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अकाली दल तब तक पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता जब तक सुखबीर और मजीठिया पार्टी का हिस्सा हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि सुखबीर बादल ने अपने निजी हितों की खातिर सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग किया है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के मौजूदा समय को ‘युग परिवर्तन ’ का समय बताया जब वास्तव में सत्ता आम लोगों के हाथों में आ गई है और इस तरह रजवाड़ाशाही के दौर का अंत हो गया है।

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