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प्रो. गुरनाम सिंह का निधन पूरे समाज के लिए असहनीय

 -- लिखितों से रहेंगे अमर--

प्रो. गुरनाम सिंह का निधन पूरे समाज के लिए असहनीय

श्री मुक्तसर साहिब, 08 दिसंबर-
 स्थानीय बुद्धीजीवी, कलम के धनी अपनी लिखितों द्वारा देश विदेश में गहरा प्रभाव छोडऩे वाले विद्वान प्रो. गुरनाम सिंह के अचानक निधन पर विभिन्न राजनीतिक, धार्मिक और समाजिक संस्थाओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। एल.बी.सी.टी. (लार्ड बुद्धा चैरिटेबल ट्रस्ट) के चेयरमैन और आल इंडिया एस.सी./बी.सी./एस.टी. एकता भलाई मंच के राष्ट्रीय प्रधान दलित रत्न जगदीश राय ढोसीवाल ने प्रो. गुरनाम सिंह की मृत्यु को पूरे समाज के कभी न पूरा होने वाला घाटा बताते हुए असहनीय करार दिया है। उल्लेखनीय है कि करीब 74 वर्ष पहले 26 अक्तूबर 1947 को पिता करतार सिंह के गृह माता भगवान कौर की कोख से गाँव धूडक़ोट रणसींह (मोगा) में पैदा हुए प्रो. साहिब अपने चार बहन भाईयों से छोटे और तीन बहन भाईयों से बड़े थे। बहनें इंगलैंड बसी हुई हैं और भाई उच्च सरकारी पदों से सेवा मुक्त हुए हैं। वर्ष 1965 में तखतूपुरा के सरकारी हाई स्कूल में मैट्रिक पास करने उप्रांत सरकारी कालिज रोडे से बी.ए. और पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से ट्रिपल एम.ए. (हिस्ट्री, पोलीटिकल साईंस और पंजाबी) करके बी.एड की डिग्री पास की। उन्होंने पहली नौकरी ए.जी. पंजाब चंडीगढ़ और फाजिलका में बैंक में करने उप्रांत 1974 में शिक्षा विभाग में बतौर लैक्चरार सेवा शुष् की और सरकारी सीनियर सैकंड्री स्कूल झबेलवाली से स्वयं इच्छित सेवा मुक्ति ले ली। इनकी शादी मई 1974 में अध्यापिका अमरजीत कौर से हुई। जिनकी कोख से दो बेटियां जगदीप कौर और किरन कौर ने जन्म लिया। दोनों बेटियां शादीशुदा और अच्छा जीवन बतीत कर रहीं हैं। सन 1980 में प्रोफैसर साहिब की मुलाकात बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक प्रधान साहिब काशी राम से हुई। उनकी अगुवाई में इन्होंने एस.सी./बी.सी. कर्मचारियों की जत्थेबंदी बामसेफ में बतौर प्रधान कार्य किया। बाद में गैर राजनीतिक समाजिक जत्थेबंदी डी.एस.-4 में कार्य करने उप्रांत बहुजन समाज पार्टी का झंडा उठाया। अपने भाषण से सरोताओं को कीलणें वाले और महान पुस्तक भारती लोक नींच किवें बने, कहे रविदास चमारा, इनही को सरदार बनाऊ, खौलदा महां सागर और धर्म युद्ध जैसी 30 पुस्तकों के लेखक प्रोफैसर साहिब इस समय मूल भारती चिंतन संघ के संस्थापक प्रधान थे। प्रधान ढोसीवाल ने कहा है कि प्रो. गुरनाम सिंह चाहे शारीरिक रूप से इस संसार में नहीं रहे परंतु वह अपनी लिखितों से अमर रहेंगे और उनकी लिखितें हमेशा समाज का मार्ग दर्शन करती रहेंगी। स्व. प्रो. गुरनाम सिंह नमित अंतिम अरदास और पाठ का भोग अगामी 12 दिसंबर रविवार को दोपहर के 12:00 से 1:00 बजे तक स्थानीय भाई महां सिंह दीवान हाल में डाला जाएगा। इस समय बड़ी संख्या मेकं उनके पैरोकार, रिश्तेदार और सज्जन सनेही उनको श्रद्धा के फूल भेंट करेंगे।  

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