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प्रशासन ने हालत तो क्या सुधारनी थी, मुद्दा ही गायब कर दिया

प्रशासन ने हालत तो क्या सुधारनी थी, मुद्दा ही गायब कर दिया
अंबेडकर पार्क में गिरी गरिलें और गायब गरिलों की तस्वीर।

प्रशासन ने हालत तो क्या सुधारनी थी, मुद्दा ही गायब कर दिया
 अंबेडकर पार्क की निशानी दरसाता और नामो-निशान मिटाए चौंक का दृष्य।

 श्री मुक्तसर साहिब, 24 फरवरी- स्थानीय जिला प्रबंधकी कंप्लैकस के नजदीक भारत के महान द्विवान, करोड़ों लोगों के मुक्ति दाता और देश के संविधान निर्माता भारत रतन बाबा साहिब डॉ. भीम राव अंबेडकर के नाम पर अंबेडकर पार्क बना हुआ है। इस पार्क की हालत बहुत तरसयोग्य है। पिछले कई महीनों से इसकी चार दीवारी वाली गरिलें टूट कर जमीन पर गिरी हुई थीं। इसी तरह ही मलोट रोड वाले मेन बस स्टेंड के सामने डॉ. अंबेडकर चौंक बना हुआ था। इस चौंक की हालत भी बेहद खस्ता थी। पार्क और चौंक की हालत सुधारने के लिए समाज और आम लोगों के भले एवं विकास को समर्पित प्रमुख गैर सरकारी समाज सेवी संस्था मुक्तसर विकास मिशन ने अपने प्रधान प्रसिद्ध समाज सेवक जगदीश राय ढोसीवाल की अगुवाई में डिप्टी कमिश्नर और एस.डी.एम. से मुलाकात की। लिखित तौर पर निवेदन भी किया गया। बातों-बातों में हालत सुधारने की बात को कही गई, परंतु सुधार अमल में न लाये गए। इतना ही नहीं इन दोनों पवित्र स्थानों की हालत तो क्या सुधारनी थी, बल्कि अंबेडकर पार्क में से गरिलें भी गायब हो गईं। जिला प्रबंधकी कंप्लैकस पास यहां चौबीस घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं, यह गरिलें गायब हो जाना प्रशासनिक लाप्रवाही है या मिली भगत। यह विषय भी विचारने योग्य है। इस तरह अंबेडकर चौंक की हालत सुधारने की बजाए चौंक में से बची खुची निशानी भी गिरा कर सडक़ बना दी गई है। शायद इस कहावत पर अमल किया गया हो कि ‘न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी’। मुक्तसर विकास मिशन के प्रधान दलित रत्न जगदीश राय ढोसीवाल ने अंबेडकर पार्क में से गरिलें गायब हो जाने और अंबेडकर चौंक का नामो-निशान मिटाए जाने की घटना की पुरजोर शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इस घटना को डॉ. अंबेडकर के पैरोकार विरोधी नीति और साजिश करार दिया है। ढोसीवाल ने दुखी मन से यह भी बताया है कि बीती 16 फरवरी को महान समाज सुधारक और रहबर सत्गुरू रविदास जी महाराज के पावन प्रकाश उत्सव समय जिले में शराब के ठेके और मांस की दुकानें खुली रहीं है, प्रशासन द्वारा इनको बंद नहीं करवाया गया। प्रशासन की इस लाप्रवाही से सत्गुरू रविदास जी महाराज के पैरोकारों के मनों को भारी ठेस पहुंची है। ढोसीवाल ने आगे कहा है कि बड़ी हैरानी की बात है कि नगर कौंसल की हदूद अंदर आते बावा राम सिंह चौंक, डॉ. केहर सिंह चौंक और भाई महां सिंह चौंक की हालत तो अक्सर सुधारी जाती है, परंतु डॉ. अंबेडकर के नाम पर बने पार्क की ना तो सुध ली जाती है और न ही डॉ. अंबेडकर चौंक की हालत सुधारी गई। प्रधान ढोसीवाल ने जिला प्रशासन से मांग की है कि डॉ. अंबेडकर पार्क की गायब हुई गरिलों को फिर से पार्क में लगवाया जाए और अंबेडकर चौंक को दोबारा से बनवाया जाए। 

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