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एक विधायक एक पैंशन का फारमूला लागू किया जाए

-- बादल की पैंशन मुख्य मंत्री की तनखाह से ज्यादा--  

श्री मुक्तसर साहिब, 13 मार्च: पिछले लंबे समय से पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों और पैंशनरों को राज्य का खजाना खाली होने की बात कह कर हर प्रकार के वित्तीय लाभ देने से मुनकर होती रही है। वर्ष 2004 के बाद सरकारी सेवा में आए कर्मचारियों को नान-पैंशन स्कीम अधीन लाकर उनकी पैंशन बंद कर दी गई, अर्थात् इनको सेवा मुक्ति के बाद कोई पैंशन नहीं मिलेगी। परंतु दूसरी तरफ राज्य के पूर्व विधायकों को कई-कई पैंशनें मिलती हैं। यह भी एक घोर अन्याय है कि उच्च शिक्षा प्राप्त और योग्ता प्राप्त करके सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारी जो करीब साठ वर्ष की उम्र तक अपनी सेवाएं निभाते हैं उनको पैंशन से वंचित रखा जाता है। जबकि देश की उच्चतम अदालत मान्नीय सुप्रीम कोर्ट ने हर सरकारी कर्मचारी को पैंशन दिए जाने का एतिहासिक फैसला किया हुआ है। दूसरी तरफ बिना किसी सैक्षनिक योग्यता के सिर्फ पाँच वर्ष विधायक रहने वाला व्यक्ति पैंशन का हकदार हो जाता है। इन पूर्व विधायकों को उनकी विधायक की टर्म के हिसाब से पैंशन दी जाती है। जितनी बार विधायक रहते हैं उतनी बार की ही पैंशन मिलती है। पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री परकाश सिंह बादल जो ग्यारह बार विधायक रहे हैं, उनको सबसे ज्यादा हर महीने पौणे छ: लाख रूपये के करीब पैंशन मिलती है। इसी तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह, मनप्रीत बादल, रजिदंर कौन भ_ल, लाल सिंह और परमिंदर सिंह ढींडसा समेत आधी दर्जन के करीब विधायक हैं जो पाँच-छ: पैंशनें लेते हैं। हाल ही में हुए विधान सभा चुनाव में 80 के करीब विधायक अपना चुनाव हार गए हैं और भविष्य में पैंशन प्राप्त करने वाले विधायकों और उनको मिलने वाली पैंशन राशि में और भी बढ़ोत्रि हो जाएगी, जिससे राज्य के खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा। एल.बी.सी.टी. (लार्ड बुद्धा चैरीटेबल ट्रस्ट) के चेयरमैन और आल इंडिया एस.सी./बी.सी./एस.टी. एकता भलाई मंच के राष्ट्रीय प्रधान दलित रत्न जगदीश राय ढोसीवाल ने आज यहां सरकारी मुलाजिमों की पैंशन बंद करने और विधायकों को पैंशनों के गफ्फे दिए जाने की नीति को बेहद मंदभागा और मुलाजिम विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा है कि विधायक के लिए चालू मौजूदा फारमूले अनुसार पूर्व मुख्य मंत्री परकाश सिंह बादल को मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान की तनखाह से चान गुना ज्यादा पैंशन मिलेगी। उल्लेखनीय है कि विरोधी धिर में रहते हुए आम आदमी पार्टी ने यह एलान किया था कि उनकी सरकार आने पर एक से अधिक पैंशन को बंद किया जाएगा। इतना ही नहीं उस समय के विरोधी धिर आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल चीमा समेत एक दर्जन के करीब पार्टी विधायकों ने यह फारमूला अपनाने के लिए उस समय के स्पीकर के.पी. राणा को लिखित रूप में मांग पत्र दिया था, परंतु कांग्रेस सरकार ने इस पर कोई अमल नहीं किया। प्रधान ढोसीवाल ने नव नियुक्त मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान से मांग की है कि उनकी पार्टी द्वारा किए गए एलान अनुसार वह अपने पद की शपथ उठाने के तुरंत बाद एक विधायक एक पैंशन का फारमूला लागू करने और 2004 के बाद सरकारी सेवा में आए कर्मचारियों के लिए पैंशन का एलान करके ऐसे कर्मचारियों की सेवा मुक्ति के बाद बाकी रहता समय और समाजिक रूतबा बरकरार रह सके।

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