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चंडीगढ़, 31 मई:
पंजाब पुलिस ने लुधियाना से एक निजी बीज फर्म के मालिक की गिरफ्तारी से पंजाब में धान के बीज घुटाले का पर्दाफाश किया है जोकि धान की कुछ नयी विकसित किस्मों के रूप में उन किस्मों के बीजों को भारी कीमतों पर किसानों को जाली बीज बेचता था जिसकी अभी तक केंद्रीय बीज सूचीकरन कमेटी की तरफ से व्यापारिक मार्किटिंग के लिए मंजूरी भी नहीं हुई थी।
इस संबंधी डीजीपी दिनकर गुप्ता ने खुलासा किया है कि लुधियाना स्थित एक निजी फर्म ‘बराड़ बीज स्टोर के तौर पर पहचान हुई है, जिसकी मालकी हरविन्दर सिंह उर्फ बच्चा बराड़ की है, जिस को लुधियाना पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने गिरफ्तार कर लिया है। पी.ए.यू. गेट नंबर 1, लुधियाना के बिल्कुल सामने चलते बराड़ बीज स्टोर के लायसेंस को रद्द कर दिया गया है और उसकी दुकान को सील कर दिया गया है।
डी.जी.पी. ने बताया कि इस केस में एफआईआर नं. 116 तारीख़ 11.05.2020 अधीन धारा 2, 3, 7 ज़रूरी वस्तुएँ कानून और बीज कंट्रोल एक्ट की धारा 3 अधीन पहले ही एक केस थाना डिवीजऩ नंबर 5, लुधियाना में दर्ज किया गया था। इस केस में हरदयाल सिंह के पुत्र, 56 साला काका बराड़ से पूछताछ की जा रही है और जांच के उपरांत इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की उम्मीद की जा रही है। मुख्य कृषि अफ़सर लुधियाना नरिन्दर सिंह बैनीपाल ने बराड़ के बीज स्टोर की पहले चैकिंग की और उसकी तरफ से गलत बीज बेचने के प्रति कार्यवाही करने का शक पाया गया।
यह जानकारी देते हुये लुधियाना के पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल ने बताया कि एसआईटी इस मामले की जांच के लिए डिप्टी कमिश्नर पुलिस, लुधियाना के रंैक के एक सीनियर अधिकारी के अधीन बनाई गई है। मुख्य कृषि अफ़सर को टीम में तकनीकी माहिर के तौर पर शामिल किया गया है।
एस.आई.टी. के द्वारा मारे गए व्यापक छापों के दौरान बराड़ बीज स्टोर में से बीजों का विशाल भंडार ज़ब्त किया गया है और नमूने विश्लेषण के लिए कृषि विभाग की लैबॉरटरी को भेजे गए। अग्रवाल ने कहा कि विश्लेषण से कुछ बीज जाली पाये गए बताए जा रहे हैं।
प्राथमिक पड़ताल दिखाती है कि बराड़ पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी (पी.ए.यू.) द्वारा विकसित की गई धान की नयी किस्मों के नाम (पी.आर. 128 और पी.आर. 129) का प्रयोग करके जाली बीज बेच कर किसानों के साथ धोखा कर रहा था। संयोगवध पीएयू ने अभी व्यापारिक तौर पर उन बीजों का उत्पादन करना है और अभी तक किसी भी निजी कंपनी को सप्लाई नहीं किये थे।
जाली बीजों की बरामदगी और ज़ब्त होने के बाद जि़ला प्रशासन ने पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिल कर लुधियाना में बीज बेचने वाली दुकानों की व्यापक चैकिंग की और बेचे जा रहे बीजों के नमूने भी लिए। यह नमूने लैबारटरी जांच के लिए भेजे गए हैं।
जि़ला पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर 9115601160, 9115601161 भी जारी किये हैं, जिससे बीज बेचने वाली दुकानों द्वारा अधिक वसूली करने और बीजों और खाद की गुणवता संबंधी किसी शक की शिकायत की जा सके।

स्वास्थ्य सुरक्षा के नियमों की सख्ती से पालना करवाने पर ज़ोर

लॉकडाउन 5.0 के लिए केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के बाद और ढील देने का ऐलान

कम्युनिटी में फैलाव की चिंताओं के दरमियान खाद्य और सिविल सप्लाईज़ विभाग को गरीबों के लिए राशन किटों में मास्क भी शामिल करने के आदेश

चंडीगढ़, 30 मई:
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पंजाब में लॉकडाउन को चार हफ़्ते बढ़ाते हुये 30 जून तक करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार के दिशा -निर्देशों के अनुसार कुछ और ढील देने का ऐलान किया।
चाहे माहिरों ने आतिथ्य उद्योग और मॉलज़ खोलने के विरुद्ध सलाह दी है परन्तु मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से लॉकडाउन 5.0 के लिए केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए अगला कदम उठाया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने आज कैबिनेट मंत्रियों भारत भूषण आशु, बलबीर सिंह सिद्धू और तृप्त रजिन्दर सिंह बाजवा समेत सीनियर अधिकारियों समेत स्वास्थ्य माहिरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा कोविड संबंधी ज़मीनी स्थिति का पता लगाने के बाद फ़ैसले का ऐलान किया। यह कदम 31 मई के बाद लॉकडाउन बढ़ाने संबंधी केंद्र सरकार के फ़ैसले की राह पर होगा।
इसके बाद फेसबुकलाइव पर कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि कोविड का ख़तरा अभी टला नहीं है और यदि ज़रूरत पड़ी तो वह पंजाबियों की जि़न्दगियां बचाने के लिए सख्त कदम उठाने जारी रखेंगे। निरंतर सचेत रहने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुये मुख्यमंत्री ने महामारी के फैलाव की रोकथाम के लिए राज्य सरकार की मदद के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ जुड़े सभी उपायों का पालना करने के लिए राज्य के नागरिकों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब में लॉकडाउन में विस्तार इस शर्त पर होगा कि सामाजिक दूरी और मास्क पहनने समेत कोविड से सम्बन्धित सुरक्षा प्रोटोकोल की सख्ती से पालना की जाये। उन्होंने गरीबों को मुफ़्त मास्क बाँटने के आदेश दिए। उन्होंने खाद्य और सिविल सप्लाईज़ मंत्री भारत भूषण आशु को ज़रूरतमंदों और गरीबों जो मास्क नहीं खरीद सकते, को राशन किटों के साथ मास्क बाँटने के लिए तुरंत ज़रुरी कदम यकीनी बनाने की हिदायत की। डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता ने वीडियो कॉनफरंसिंग के दौरान बताया कि सभी जिलों में मास्क पहनने की पालना को सख्ती से लागू किया जा रहा है और उल्लंघन करने वालों से अब तक एक करोड़ से अधिक राशि जुर्माने के रूप में एकत्रित की गई है।
मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने निगरानी करने और रोग का पता लगाने के लिए घरों की निगरानी और कोविड फुट सोलजर की तैनाती के लिए राज्य सरकार की योजनाओं संबंधी ताज़ा जानकारी माँगी। इस दौरान स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग अग्रवाल ने बताया कि इन दोनों योजनाओं को अगले कुछ दिनों में शुरू किया जायेगा। उन्होंने बताया कि जिलों में आशा वर्करों और भाईचारे की अन्य स्थानीय महिलाओं को घर -घर निगरानी करने के लिए साथ जोड़ा जायेगा और उनको हर घर का सर्वेक्षण करने के लिए प्रति व्यक्ति 2 रुपए अदा किये जाएंगे। लक्षण वाले मामलों जिन संबंधी स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित नहीं किया जा रहा, की ट्रेसिंग और ट्रेकिंग के लिए एक एप की इस समय पर फील्ड टेस्टिंग की जा रही है और अगले 2-3दिनों में लाँच की जायेगी। श्री अग्रवाल ने बताया कि ऐसे मामलों संबंधी स्वैच्छा के साथ रिपोर्ट करने के लिए नौजवानों को यह एप डाउनलोड करने के लिए कहा जायेगा। उन्होंने बताया कि इन कोविड फुट सोलजऱों की ओ.टी.पी. के ज़रिये प्रमाणिकता यकीनी बनाई जायेगी जिससे गलत सूचना को रोका जा सके।
बाद में फेसबुकसैशन के ज़रिये मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में बाहर से आने वालों ख़ासकर विदेशों से लौटने वालों की तरफ से स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित न करना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि इससे उनके संपर्क में आने वालों को ढूँढना कठिन हो जाता और बाकियों की जान भी जोखिम में पड़ती है। उन्होंने कहा कि चाहे रोज़मर्रा के मामलों में समूचे तौर पर कमी आई है और अब तक 2158 केस पॉजिटिव आए हैं जिनमें से 1946 व्यक्ति स्वस्थ्य हो गए हैं परन्तु पिछले कुछ दिनों में नये मामलों के सामने आना चिंता का विषय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि राज्य सरकार की तरफ से जा रही मैडीकल जांच के बिना वापसी करने वालों के बारे में सूचित करने की अपील की।
मुख्य सचिव करण अवतार सिंह द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री को कोविड को फैलने से रोकने के लिए अन्य राज्यों से लोगों के बड़ी संख्या में आने को ध्यान में रखते हुए हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर किए जा रहे टैस्टों/स्क्रीनिंग बारे जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि राज्य को आने वाले सभी लोगों की स्क्रीनिंग करने के साथ-साथ घरों में 14 दिन का एकांतवास लाजिमी किया गया, इसके साथ ही हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर टेस्टिंग सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने बताया कि जिनके द्वारा कौवा ऐप डाऊनलोड नहीं किया गया है उनके द्वारा रेल सफर के दौरान ही घोषणा फार्म भरकर स्टेशनों पर सौंप दिए जाते हैं।
स्वास्थ्य सम्बन्धी सभी नियमों को सख्ती के साथ लागू किये जाने पर जोर देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अपने फेसबुक सैशन के दौरान कहा कि 17 मई से 28 मई तक केवल 11 दिनों के अंदर 36,820 व्यक्तियों को मास्क न पहनने और 4032 लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर थूकने के लिए जुर्माने किये गए हैं। उन्होंने बताया कि केवल गुजरे 24 घंटों के दौरान 6061 लोगों को मास्क न पहनने के लिए जुर्माने किये गए हैं और इस समय के दौरान नियमों के उल्लंघन के मामलों में 503 एफ.आई.आर दर्ज की गई हैं।
एक अन्य सवाल के जवाब में कम्युनिटी स्तर पर कोविड के फैलाव की संभावनाओं के प्रसंग में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह खतरा है जिसका हम सामना कर रहे हैं और छूटों बारे फैसले दौरान इसको पूरी तरह ध्यान में रखा जायेगा। अमृतसर में मामलों बारे एक निवासी द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि बीते कल रिपोर्ट हुए 7 मामलों में से 6 संपर्क के साथ सम्बन्धित केस थे।
रैपिड टेस्टिंग किटों बारे कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि जो किटें चीन और दक्षिणी कोरीया से आईं थीं वह खराब होने के कारण वापस कर दी गई थीं।
दुबई निवासी जो चंडीगढ़ आना चाहता है, द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि दुबई से रोजाना तीन फ्लाईटों के साथ-साथ अन्य फ्लाईटें फिर से शुरू हो रही हैं। उन्होंने कहा कि आम फ्लाईटें अभी शुरू नहीं हुई और उन्होंने सवाल पूछने वाले व्यक्ति को भारतीय अम्बैसी के दफ्तर से संपर्क में रहने के लिए कहा।
एक प्रश्न करने वाले को मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके द्वारा निजी बसों को गाँवों में चलाए जाने से नहीं रोका गया और इस सम्बन्धी फैसला निजी बस चलाने वालों द्वारा किया जाना है।
लॉकडाउन के दौरान नकली शराब सम्बन्धी की गई छापामारी बारे मुख्यमंत्री ने बताया कि इस संबंधी 97 भट्टियाँ सील की गई, 1729 मामले दर्ज किये गए और 1360 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंजाब में शराब की तस्करी करने का यत्न करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही कर रही है।
मुख्यमंत्री द्वारा इस वर्ष एक और भरपूर फसल देने के लिए किसानों की प्रशंसा करते हुए कहा गया कि 128 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीद के साथ करीब 23000 करोड़ रुपए ग्रामीण आर्थिकता की चलाई के लिए उपलब्ध हुए हैं।
टिड्डी दल के खतरे बारे मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के साथ लगते 7 जिलों में इसकी रोकथाम के लिए मुकम्मल इंतजाम किये जा चुके हैं।
स्कूलों द्वारा सरकार की हिदायतों के उल्लंघन संबंधी एक लुधियाना निवासी द्वारा शिकायत संबंधी मुख्यमंत्री द्वारा डिप्टी कमिश्नर को ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के लिए कहा गया।
एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह यह जानकर खुश हैं कि राज्य में 85 फीसदी औद्योगिक ईकाईयों द्वारा 65 फीसदी कामगार की सम्मिलन के साथ काम शुरू कर दिया गया है। एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा कुआर्क समेत कई अंतर-राष्ट्रीय आई.टी फर्मों को मोहाली में स्थापति के लिए सुविधा दी जा रही और हालातों में सुधार होने से बड़ी संख्या में कंपनियाँ पंजाब आएंगी।
अतिरिक्त कर्ज लेने संबंधी केंद्र की शर्तों संबंधी पूछे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि संघीय ढांचे में अपने लोगों की आर्थिक तरक्की के लिए राज्यों की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि, हम अपने लोगों की आर्थिक जरूरतों के लिए जिम्मेदार हैं और केंद्र को संघीय ढांचे की भावनाओं के अंतर्गत ऐसी शर्तों को हटाना चाहिए।

कांग्रेसी नेताओं का हरसिमरत बादल पर पलटवार 
कहा हरसिमरत ने केंद्रीय मंत्री के पद का दुरुपयोग करते हुए मजीठिया कि की थी मदद

चंडीगढ़, 30 मई:

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत बादल द्वारा कथित बीज घोटाले संबंधी केंद्रीय एजेंसी से जांच करवाने की माँग पर पलटवार करते हुए कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि हरसिमरत अगर सच्चे दिल से पंजाब और पंजाबियों की हितैषी है तो ड्रग तस्करी केस में अपने भाई बिक्रम मजीठिया की बंद पड़ी जांच फिर से शुरू करवाए जिससे पंजाब की जवानी को बर्बाद करने वालों का चेहरा नंगा हो सके।
आज यहाँ पार्टी हैडक्वार्टर से जारी साझे प्रैस बयान में कांग्रेसी विधायकों दर्शन सिंह बराड़, बरिन्दरमीत सिंह पाहड़ा, कुलबीर सिंह जीरा, रवीन्द्र सिंह आँवला, दविन्दर सिंह घुबाया (सभी विधायक) और प्रीतम सिंह कोटभाई ने कहा कि बादल परिवार ने पंजाब के हितों को दरकिनार कर केंद्र में मंत्री बनाई गई हरसिमरत बादल की यादशात भी बहुत कमजोर है। आज वह कथित बीज घोटाले में केंद्रीय एजेंसी से जांच करवाने की माँग कर रही है परन्तु यह भूल गई है कि अपने भाई बिक्रम मजीठिया के खिलाफ ड्रग तस्करी मामले में इनफोर्समैंट डायरैक्टोरेट (ई.डी.) की जांच को अपना रसूख इस्तेमाल करके बंद करवाया था। हरसिमरत के दोहरे मापदंड को उजागर करते हुए कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि पिछले छह सालों से हरसिमरत ने केंद्रीय मंत्री के तौर पर पंजाब को एक पैसे का भी फायदा नहीं दिलाया। उल्टा हरसिमरत ने अपने भाई की ई.डी. जांच बंद करवाई और पंजाब के खिलाफ केंद्र सरकार के हर फैसले में बढ़-चढक़र भूमिका निभाई।
कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि अकाली दल पर काबिज बादल-मजीठिया परिवार अपना खोया हुआ राजनैतिक आधार फिर से बहाल करने के लिए प्रतिदिन बिना सिर पैर के कांग्रेसी नेताओं पर तथ्य रहित दोष लगाता रहता है। उन्होंने कहा कि ऐसीं भद्दी हरकतों से अकाली दल अपना खोया हुआ लोक आधार नहीं बहाल कर सकेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग बादलों के झूठ और फरेब से भलीभांति परिचित हैं और उनकी बातों में नहीं आएंगे।
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राज्य भर में 1325 दुकानों और कैमिस्ट दुकानों पर छापे मारे गए


चंडीगढ़, 28 मई:

राज्य के लोगों को वस्तुओं के असल भाव से अधिक कीमत वसूलने से बचाने के मकसद से राज्य भर में 1325 दुकानों और कैमिस्ट दुकानों पर छापे मारे गए, जिनमें से 176 व्यापारिक संस्थाएं असल कीमत से अधिक कीमत वसूल कर रहे थे, जिनके विरुद्ध कार्यवाही करते हुए उनको 11,02,000 के जुर्माने किए गए हैं। 

यह जानकारी आज यहाँ पंजाब के उपभोक्ता मामलों संबंधी मंत्री श्री भारत भूषण आशु ने दी।

उन्होंने बताया कि वस्तुओं की असल कीमत से अधिक कीमत वसूलने सम्बन्धी उनके विभाग को 7 शिकायतें मिली थीं, जिन पर कार्यवाही करते हुए राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई, जिस दौरान 186 दुकानदारों पर तय कीमत से अधिक कीमत वसूल करने के मामले में पी.सी.आर. एक्ट और अन्य सम्बन्धित धाराओं के अधीन मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा 176 दुकानदारों का पी.सी.आर. एक्ट और अन्य सम्बन्धित धाराओं के तहत मामले दर्ज करके जुर्माने किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिन्दर सिंह के आदेशों के अनुसार विभाग राज्य में ज़रूरी वस्तुओं की बिक्री एम.आर.पी. या उससे कम  होने को यकीनी बनाने के लिए विभाग लगातार काम कर रहा है।

ड्राईविंग टैस्ट देने सम्बन्धी तारीख़ और समय लेने के लिए पहले करवानी होगी बुकिंग

चंडीगढ़, 28 मई:
पंजाब सरकार ने नागरिकों को रैगूलर ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए ड्राइविंग टैस्ट देने सम्बन्धी समय और तारीख़ की प्री-बुकिंग करवाने की सुविधा देने के लिए एक ऑनलाइन प्रणाली की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि ड्राइविंग टैस्ट के इस मंतव्य के लिए ड्राइविंग ट्रैक 1 जून, 2020 से कार्यशील हो जाएंगे।
यह खुलासा आज यहाँ जारी प्रैस बयान में स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर डॉ. अमरपाल सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि अब कोई व्यक्ति सिर्फ प्री-बुकिंग के अनुसार ही टैस्ट दे सकेगा और अधिकारियों की अपने विवेक के अनुसार टैस्ट आयोजित कराने सम्बन्धी शक्तियां वापस ले ली गई हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बुक किए गए समय पर उपस्थित नहीं होता तो टैस्ट सम्बन्धी समय दोबारा बुक करवाना होगा। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने कहा कि अपनी बारी से पहले टैस्ट देना या बिना बुकिंग करवाए टैस्ट देना किसी व्यक्ति के लिए संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इससे लोगों के साथ होने वाले शोषण को भी रोका जा सकेगा।
डॉ. अमरपाल सिंह ने आगे कहा कि एक और विशेषता जिसे शुरू किया गया है, वह है कि लाइसेंस के टैस्ट का नतीजा और लाइसेंस बनाने सम्बन्धी प्रक्रिया एक ही दिन के अंदर शुरू की जाएगी। हरेक ट्रैक पर उपलब्ध स्लॉट्स की संख्या 40 तक सीमित कर दी गई है, जिससे कोविड-19 के मद्देनजऱ शारीरिक दूरी को बरकरार रखा जा सके। जनता की सुविधा के लिए अब व्यक्ति अपनी परीक्षा देने के लिए जि़ले में किसी भी ट्रैक की चयन कर सकेगा, जबकि पहले सिफऱ् एक ही टैस्ट ट्रैक चुनना पड़ता था।
ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने कहा कि लर्नर लाइसेंस संबंधी पहले वाली विधि ही जारी रहेगी और जनता यह लाइसेंस 500 से अधिक सेवा केन्द्रों और आरटीए / एसडीएम कार्यालयों से प्राप्त करने के योग्य होंगे।
‘‘मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के अंतर्गत जारी किए गए सभी दस्तावेज़ों के नवीनीकरण के लिए कोई लेट फीस नहीं ली जाएगी, जिसमें फरवरी 2020 के बाद ख़त्म हुए ड्राइविंग लाइसेंस भी शामल हैं।’’ स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने कहा कि टैस्ट देने सम्बन्धी प्री-बुकिंग के लिए कोई भी वैबसाईट www.sarathi.parivahan.gov.in पर लॉगइन कर सकता है।

तालाबन्दी के दौरान लोगों की सहायता करने में केंद्र सरकार नाकाम-राणा सोढी
केंद्र सरकार से आय कर के दायरे से बाहर वाले परिवारों के लिए 7500 रुपए प्रति महीना सहायता की माँग
कांग्रेस पार्टी देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी

चंडीगढ़, 28 मई:
कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन के कारण लोगों की आर्थिक और शारीरिक दुर्गति के मुद्दे पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पंजाब के खेल एवं युवा और एन.आर.आईज़. मामलों संबंधी मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने माँग की है कि आय कर के दायरे से बाहर परिवारों के बैंक खातों में 7500 रुपए प्रति महीना छह महीनों के लिए जमा करवाए जाएँ, जिससे सभी परिवार दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर सकें। उन्होंने माँग की कि इन परिवारों को तत्काल 10 हज़ार रुपए की राशि गुज़ारे के लिए तत्काल दी जाए।
यहाँ अपने सरकारी निवास से आज फेसबुक पेज पर लाइव होकर राणा गुरमीत सिंह सोढी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इस महामारी को रोकने के लिए लागू की गई तालाबन्दी के दौरान लोगों को राहत पहुँचाने में बिल्कुल नाकाम रही है, जबकि देश भर में सभी वर्गों का बुरा हाल हुआ पड़ा है। लोग आर्थिक तौर पर ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक तौर पर भी टूट चुके हैं। मँहगाई अपने शिखर पर है, आर्थिक हालात डावांडोल हैं और मज़दूर सडक़ों पर धक्के खाने के लिए मजबूर हैं परन्तु केंद्र सरकार को लोगों की कोई चिंता नहीं है।
पंजाब सरकार द्वारा मुश्किल की इस घड़ी में लोगों की हर संभव मदद करने के प्रण को फिर दोहराते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस समय लाखों प्रवासी मज़दूर, महिलाएं और बच्चे अपने घरों, शहरों और गाँवों को वापस जाना चाहते हैं, परन्तु केंद्र सरकार ने उनको कोई राहत तो क्या देनी थी, बल्कि उनका रेल का किराया भी माफ नहीं किया जा रहा। इसकी बजाय पंजाब सरकार उनका रेल किराया ख़ुद भर रही है। उन्होंने कहा कि देशव्यापी तालाबन्दी के शुरू होने के बाद छोटे कारोबारियों जैसे कि रिक्शा चालकों, रेहडिय़ों वालों, नाई की दुकानों और देहाड़ीदारों को काफ़ी नुकसान हुआ है। उनको भी तत्काल वित्तीय सहायता देने की ज़रूरत है।
राणा सोढी ने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे की तरफ तुरंत कोई ध्यान न दिया तो कांग्रेस पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरु करेगी और सरकार को लोगों की मदद करने के लिए मजबूर कर देगी।

सिर्फ प्रमाणित टिकटों वाले यात्रियों को ही रेलवे प्लेटफॉर्म में दाखि़ल होने की आज्ञा दी जाएगी

सभी यात्रियों के पास प्रमाणित आई.डी. प्रूफ़ हों और उनको स्वै-घोषणा पत्र जमा करवाना होगा

स्क्रीनिंग के दौरान कोरोना के लक्षण पाए जाने वाले यात्रियों को जांच के लिए स्वास्थ्य संस्था में ले जाया जाएगा

चंडीगढ़, 28 मई:  पंजाब सरकार द्वारा आज रेलगाडिय़ों के द्वारा यात्रा करने वाले व्यक्तियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि सभी यात्रियों के लिए मास्क पहनना और शारीरिक दूरी बनाकर रखना ज़रूरी होगा। अनावश्यक भीड़ से बचने के लिए सिफऱ् प्रमाणित टिकटों वाले यात्रियों को ही रेलवे प्लेटफॉर्म में दाखि़ल होने की आज्ञा दी जाएगी। यह भी अनिवार्य किया गया है कि ऐसे सभी यात्रियों की प्लेटफॉर्म में दाखि़ल होने से पहले थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी और यात्री रेलगाड़ी के रवाना होने के समय से 45 मिनट पहले पहुँचेंगे। उन्होंने आगे कहा कि सिफऱ् कोरोना के लक्षण न पाए जाने वाले यात्री रेलगाडिय़ों में सवार हो सकते हैं और सभी यात्रियों के पास एक प्रमाणित
आई.डी. प्रूफ़ (आधार कार्ड / ड्राइविंग लाइसेंस / वोटर कार्ड / सरकार द्वारा जारी कोई अन्य आई.डी. प्रूफ़) हो और उनको स्क्रीनिंग के लिए नियुक्त की गई स्वास्थ्य टीम को स्वै-घोषणा पत्र जमा करवाना होगा, जिसमें नाम, उम्र, पता, मोबाइल नंबर और कोरोना के लक्षणों की जांच सूची आदि विवरण दर्ज किए जाएंगे। रेलवे स्टेशन पर एक कमरा होगा, जहाँ स्वास्थ्य टीम व्यक्तियों की जांच करेगी।
प्रवक्ता ने बताया कि सम्बन्धित जि़लों की सभी निगरानी टीम के पास रेलगाड़ी के द्वारा उनके क्षेत्र में आने वाले व्यक्तियों की पूरी सूची हो और उनको 14 दिनों के घरेलू एकांतवास में रखा जाना यकीनी बनाया जाए, (अक्सर आने-जाने वाले यात्रियों को छोडक़र)। सभी निगरानी टीम के पास लाजि़मी तौर पर उनके क्षेत्र में अक्सर आने वाले यात्री, जिनको जि़ला प्रशासन द्वारा पास जारी किए गए हैं, की सूची होनी चाहिए और सभी यात्रियों को कोवा एप डाउनलोड करनी होगी, जिसका चलते रहना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग के दौरान कोरोना के लक्षण पाए जाने वाले यात्रियों को जांच के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में ले जाया जाएगा। कोरोना पॉजि़टिव पाए जाने पर स्वास्थ्य प्रोटोकोल के अनुसार उनका इलाज किया जाएगा। जिन व्यक्तियों में कोरोना के लक्षण नहीं पाए जाते या कोरोना नेगेटिव पाए जाते हैं, उनको 14 दिनों के घरेलू एकांतवास में रहने और अपने स्वास्थ्य की स्वै-निगरानी सम्बन्धी स्वै-घोषणा देने के बाद घर जाने की आज्ञा दे दी जाएगी और उनको कोविड-19 का कोई भी लक्षण दिखाई देने पर नज़दीकी स्वास्थ्य संस्था को अनिवार्य रूप से सूचित करना होगा।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अंतरराज्याीय सफऱ करने वाले जिनको अक्सर पंजाब से बाहर जाना पड़ता है जैसे एमपी, एमएलए, विक्रेता, ट्रांसपोर्टर, पत्रकार, डॉक्टर, एग्जि़क्युटिव, इंजीनियर, व्यापारी और सलाहकाार आदि को घर में क्वारंटाइन करने की ज़रूरत नहीं है। डिप्टी कमिश्नर और सब-डिविजऩल मैजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्तियों को पास जारी करेंगे जो अपने स्वास्थ्य की स्वै-निगरानी सम्बन्धी स्वै-घोषणा देंगे और कोविड का कोई भी लक्षण दिखाई देने पर प्रशासन को सूचित करेंगे। ऐसे यात्री जिनके पास घरेलू क्वारंटाइन की समय सीमा पूरी होने से पहले वापसी की टिकट है तो उनको कोई लक्षण न पाए जाने पर रेलगडिय़ों में सवार होने की आज्ञा दे दी जाएगी। अगर ऐसे व्यक्ति में लक्षण पाए जाते हैं तो उसका स्वास्थ्य प्रोटोकोल के अनुसार जांच और इलाज किया जाएगा।


जनता की रक्षा करना, सुविधाएं उपलब्ध करवाना तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की जिम्मेवारी
देश में कोरोना मरीजों की संख्या कुछ ही दिनों में हुई लाखों में परन्तु न लोग जागे और न ही सरकारें
दोष दूसरे को देना कि वह नहीं काम करता और वह नहीं काम करता राजनीतिक पार्टियों का नारा बन चुका है


कोरोना वायरस की चपेट में सारा विश्व आया हुआ है। अमेरिका, ब्राजील, रशिया, स्पेन, यू.के. इटली, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की आदि देशों सहित दूसरे देशों में कोरोना के मरीजों की संख्या लाखों में पहुँच गई है जो अब भारत में भी कोरोना के मरीजों की संख्या भी लाखों में हो गई है, परन्तु हैरान करने वाली बात यह है कि इसको ले कर ना तो लोगों की आँखें खुलीं है और ना ही सरकारों की नींद को कोई फर्क पड़ा है। जब कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या सैंकड़ों में थी तो सरकारों की बातें थी कि अब हम मिल कर जागरूकता मुहिम चलानी है जिससे मरीजों की संख्या हजारों में न हो, परन्तु मरीजों की संख्या लाखों में भी हो गई है परंतु नाम तो कोरोनों के प्रति लोगों ने गंभीरता दिखाई और ना ही सरकारों ने कोई चेतनता दिखाई परन्तु यह जरूर हुआ कि जब मरीजों की संख्या सौ में थी सब कुछ बंद कर दिया गया, जब हजारों में हुई तो कुछ छूट दे दी गई और अब लाखों में हो गई है तो स्कूलों, कालेजों को छोड़ बाकी सभी काम-कामों को खोल दिया गया है। लोगों को सामाजिक दूरी का पालन करने और नियमों का पालन करने की हिदायतें जरूर जारी कर दीं गई परंतु देखने में कुछ खास असर दिखाई नहीं दिया। देश के जिन प्रदेशों में कोरोनों के मरीज नहीं भी थे अब उन प्रदेशों में भी मरीज सामने आने लग पड़े हैं। लोगों को भी नियमों का पालन करने के लिए प्रशासन को जुर्माने या चालान का सहारा लेना पड़ रहा है। मानते हैं कि मनुष्य की कई जरूरतें हैं परंतु अपनी जान और परिवार से अधिक कुछ नहीं होता। इस बात को मद्देनजर रखते हुए लोगों को जहाँ आप जागरूक होना पड़ेगा वहीं दूसरों को भी जागरूक करना पड़ेगा परन्तु हो उल्टा रहा है ना तो लोग खुद नियमों की पालना करना जरूरी समझ रहे हैं और ना ही दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं। बात तो यह है कि नियमों की पालना पहले खुद करनी पड़ती है फिर ही हम दूसरों को उन नियमों की पालना करने के लिए पे्ररित कर सकते हैं। मनुष्य को आज के समय में एक आदत पड़ चुकी है कि मुझे दूसरे के साथ क्या लेना देना है, दूसरा जो मर्जी करे हमें क्या। चलो लोगों के बारे में नहीं सोचना तो ना सोचो लेकिन अपने बच्चों तथा परिवार के बारे सोच लेना चाहिए। जब कोई व्यक्ति घर से बाहर कुछ खरीददारी करने के लिए जाता है, यदि वह सामाजिक दूरी का पालन करता है, मास्क लगाता है तो वह घर में कोरोना की बीमारी नहीं ले कर आता परन्तु अगर नियमों की पालना नहीं करता तो वह जहाँ परिवार  में बीमारी को ले कर आता है, वहां पता नहीं कितने लोगों को यह बीमारी तोहफे के रूप में भी दे देता है। इस लिए लोगों को एक बात समझ लेनी चाहिए कि यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि जब यह रोग किसी को लग जाता है तो सज्जन, रिश्तेदारों की बात तो दूर अपना परिवार भी साथ छोड़ जाता है। इस लिए आप ही हमें स्वास्थ्य विभाग की हिदायतों का पालन करना चाहिए। अब बात करते हैं केंद्र और राज्य सरकारों की, जो कि जब बीमारी देश में आई थी ना तो तब ही कुछ चेतन थे और अब जब मरीजों की संख्या लाखों में हो गई है अब तो बिल्कुल ही आँखें खोल कर ही सोए पड़े हैं। जनता की किसी भी समस्या और कुदरती आफत के समय पर लोगों की रक्षा करना और लोगों को सुविधाएं मुहैया करवाना सरकारों की जिम्मेवारी होती है, जिस केंद्र सरकार भी भाग हो रही है और राज्य सरकारें भी अपनी जिम्मेवारी को निभाने में गंभीर नहीं हैं हैं । एक बात के प्रति पूरी तरह के साथ गंभीर हैं और जागृत हैं कि एक दूसरे पर आरोप किस तरह लगाने हैं और दूसरे को निंदा कैसे करनी है। जहाँ कांग्रेस पार्टी की सरकारें हैं वह यह बात कहते सुने जाते हैं कि केंद्र सरकार हमारा साथ नहीं दे रही और केंद्र सरकार का एक ही जवाब होता है कि राज्य सरकारों को पैसे भेज दिए गए हैं परन्तु वह सही स्थान पर नहीं लगा रही। सरकारें इस बात को भूल चुकीं हैं कि लोग कोई बच्चे नहीं, क्या हो रहा है कौन काम कर रहा कौन नहीं सब कुछ जानते हैं परन्तु अपनी जिम्मेवारी से भागना कोई अच्छी बात नहीं कही जा सकती। सरकारों को एक बात हमेशा ही याद रखनी चाहिए कि जिस दिन जनता अपनी जिम्मेवारी को भूल गई तो हालातों पर काबू पाना बहुत ही कठिन हो जायेगा। कुल मिला कर बात यहाँ आ कर खत्म होती है कि यदि अब भी लोग और सरकारें न जागीं तो वह दिन दूर नहीं जब एक व्यक्ति दूसरे को मिलना तो दूर की बात देखने से भी दूर भागेगा। इंसानियत बिल्कुल खत्म हो जायेगी। इंसानियत को बचाने और मानव को बचाने के लिए हमें सभी को मिल कर अब भी जागरूक हो जाना चाहिए नहीं तो हालात बहुत ही मुश्किल भरे होंगे।





























लेखक
मनप्रीत सिंह मन्ना
गढ़दीवाला।
मोबा और वट्टसअप्प 09417717095,078148 -00439।  


मंत्री मंडल द्वारा कोविड -19 के दरमियान गेहूँ की निर्विघ्न खरीद यकीनी बनाने के लिए खाद्य मंत्री और विभाग की सराहना

चंडीगढ़, 27 मई:
पंजाब सरकार द्वारा राज्य में लॉकडाऊन से सम्बन्धित अगला कदम उठाने का फ़ैसला 30 मई को लिया जायेगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह राज्य में कोविड की स्थिति संबंधी 30 मई को सम्बन्धित विभागों के साथ मीटिंग करके जायज़ा लेंगे और लॉकडाऊन हटाने या आगे बढ़ाने संबंधी सरकार के फ़ैसले का ऐलान करेंगे।
मंत्री मंडल की मीटिंग के बाद यह प्रगटावा करते हुये एक प्रवक्ता ने बताया कि मंत्री मंडल ने फ़ैसला किया कि मौजूदा लॉकडाऊन ख़त्म होने से कुछ दिन पहले ज़मीनी स्थिति का पता लगाने के बाद अगला कदम उठाना चाहिए। लॉकडाऊन में बिना ढील या ढील के साथ विस्तार करने का फ़ैसला जायज़ा मीटिंग के बाद लिया जायेगा।
इसी दौरान मंत्री मंडल ने खरीफ के मंडीकरण सीजन 2020 -21 के दौरान ख़ास कर कोविड-19 के कठिन समय और लॉकडाऊन के मौके गेहूँ की निर्विघन खरीद को यकीनी बनाने के लिए खाद्य और सिविल सप्लाईज़ विभाग को बधाई दी।
मंत्री मंडल ने  राज्य की लगभग 4000 मंडियों में गेहूँ की खरीद के व्यापक कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए विशेष तौर पर खाद्य और सिविल सप्लाई मंत्री भारत भूषण आशु की सराहना की क्योंकि मंडियों में सभी भाईवालों की सुरक्षा के लिए सामाजिक दूरी समेत स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों की सख्ती से पालना को यकीनी बनाया गया।
इस कठिन समय में निर्विघ्न खरीद कामों की सराहना करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह बहुत संतोष वाली बात है कि ख़ाद्य और सिविल सप्लाईज़ विभाग और पंजाब मंडी बोर्ड ने डेढ़ महीने के रिकार्ड समय गेहूँ की खरीद के लिए पुख़्ता प्रबंधों करने के लिए दिन -रात एक किया। मंडियों में भीड़ -भाड़ को रोकने के लिए मंडी बोर्ड की तरफ से क्रमवार गेहूँ लाने के लिए किसानों को आढ़तियों के द्वारा 17.34 लाख पास जारी किये गए।
26 मई तक विभिन्न एजेंसियों की तरफ से 126.80 लाख मीट्रिक टन गेहूँ खऱीदी गई जिसमें से 123.64 लाख मीट्रिक टन गेहूँ मंडियों में से उठाई गई और किसानों को अब तक 21004.68 करोड़ रुपए की अदायगी भी कर दी गई है। 


पंजाब सरकार द्वारा राज्य में दाखि़ल होने वाले सभी यात्रियों के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी-बलबीर सिंह सिद्धूइस विषय पर सभी शंकाओं को दूर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्रियों के लिए मुकम्मल विवरण तैयार

चंडीगढ़, 26 मई:
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के पंजाब में दाखि़ल होने वाले हरेक व्यक्ति को लाजि़मी तौर पर एकांतवास किए जाने सम्बन्धी एलान के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा हवाई, रेल और सडक़ यात्रा के द्वारा पंजाब आने वाले अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्रियों के लिए स्वास्थ्य प्रोटोकोल एवं प्रक्रिया सम्बन्धी एक विस्तृत एडवाइजऱी जारी की गई है।
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि कोविड-19 से पैदा हुई स्थिति के कारण भारत सरकार द्वारा समय-समय पर संशोधित किए गए प्रोटोकोल और एडवाइजऱीज़ जारी की जा रही हैं, जो देश में आने वाले यात्रियों के मन में, ख़ासकर भारत सरकार द्वारा 24 मई को जारी ताज़ा एडवाइजऱी के बाद, कई उलझनें पैदा कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अब पंजाब के स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और यह स्पष्ट किया गया है कि सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को एंट्री प्वाइंट पर स्वास्थ्य प्रोटोकल के अनुसार अपनी स्क्रीनिंग के लिए राज्य के अधिकारियों को निजी और स्वास्थ्य सम्बन्धी विवरणों समेत स्वै-घोषणा भी देनी होगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने ज़ोर देते हुए कहा कि वायरस के फैलाव को रोकने के लिए सक्रिय टेस्टिंग, ट्रेसिंग और एकांतवास ही एकमात्र उपाय है और कहा कि वह हमारे लोगों के जिवन के प्रति किसी भी तरह का जोखि़म नहीं लेंगे। 
स्क्रीनिंग के दौरान लक्षण पाए जाने वाले अंतराष्ट्रीय यात्रियों को टेस्टिंग के लिए स्वास्थ्य संस्था में ले जाया जाएगा और कोविड टेस्टिंग के लिए आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के मुताबिक उनके आरटी पीसीआर सैंपल लिए जाएंगे। उन्होंने आगे बताया कि जो व्यक्ति पॉजि़टिव पाए गए हों और लक्षण न हों, 60 साल से कम उम्र के हों और किसी अन्य बीमारी से पीडि़त न हों, को कोविड केयर सेंटरों में रखा जाएगा।
जो व्यक्ति पॉजि़टिव हैं और मैडीकल निगरानी अपेक्षित है ( चाहे गंभीर लक्षण होने के कारण या 60 साल से अधिक उम्र होने के कारण या अन्य बीमारी से पीडि़़त होने के कारण), उनको डॉक्टरी स्थिति के आधार पर दर्जा 2 या दर्जा 3 की स्वास्थ्य सुविधा में रखा जाएगा। 
जिन यात्रियों में लक्षण नहीं पाए जाते और जो नेगेटिव पाए जाते हैं, उनको भुगतान के आधार पर संस्थागत एकांतवास (सरकारी / होटल क्वारंटीन) में रखा जाएगा और 5वें दिन उनका टैस्ट किया जाएगा। अगर उनकी टैस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो उनको संस्थागत एकांतवास के 7 दिन पूरे होने पर घर जाने की आज्ञा दे दी जाएगी और उनको अगले 7 दिन तक घरेलू एकांतवास में रहने और अपनी स्वास्थ्य की स्वै-निगरानी की सलाह दी जाएगी। इस सम्बन्धी लिखित घोषणा स्वास्थ्य अधिकारियों / जि़ला प्रशासन को जमा करवानी होगी। 
प्रवक्ता ने बताया कि असाधारण हालत जैसे गर्भावस्था / पारिवारिक सदस्य की मौत / गंभीर मानसिक बीमारी सम्बन्धी मामलों में, डिप्टी कमिश्नर संस्थागत क्वारंटाइन की बजाय 14 दिनों के लिए होम क्वारंटाइन की आज्ञा दे सकते हैं और इस सम्बन्धी स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना होगा।
इसके अलावा, ऐसे सभी यात्रियों को  कोवा एप डाउनलोड करने की ज़रूरत होगी, जो किर्याशील रहेगी।
उन्होंने कहा कि घरेलू यात्रियों के लिए हवाई जहाज़ / रेल / अंतरराज्यीय सडक़ के द्वारा पंजाब में दाखि़ल होने वाले सभी व्यक्तियों की एंट्री प्वाइंट्स पर ही कोविड-19 के लक्षणों सम्बन्धी स्क्रीनिंग भी की जाएगी।
स्क्रीनिंग के दौरान पॉजि़टिव पाए गए यात्रियों को जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाएगा। उपरोक्त के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति पॉजि़टिव है, उनको डॉक्टरी ज़रूरतों के मुताबिक दर्जा 2 या दर्जा 3 की स्वास्थ्य सुविधाओं में रखा जाएगा।
अगर किसी व्यक्ति में कोविड सम्बन्धी लक्षण न हों या टेस्टिंग नेगेटिव है तो उसको एक अंडरटेकिंग जमा करवाने के बाद घर जाने की इजाज़त दी जाएगी। इस अंडरटेकिंग में 14 दिनों के लिए घर में एकांतवास, अपनी स्वास्थ्य स्थिति की स्वै-निगरानी और कोविड-19 सम्बन्धी कोई भी लक्षण नजऱ आने पर नज़दीकी स्वास्थ्य सुविधा को सूचित करना लाजि़मी होगा। सभी यात्रियों को कोवा एप डाउनलोड करना लाजि़मी है, जो हमेशा किर्याशील रहेगी।
पंजाब से अक्सर बाहर जाने या अंतर-राज्यीय यात्रा करने वाले यात्री जैसे कि एम.पी. / एम.एल.ए., डॉक्टर, पत्रकारों, इंजीनियरों, कार्यकारी, व्यापारी, ट्रांसपोर्टरों, सलाहकार आदि को होम क्वारंटीन रखने की ज़रूरत नहीं है।
डिप्टी कमिश्नर और सब-डिविजऩल मैजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्तियों को पास जारी करने के लिए अधिकृत हैं, जो अपनी स्वास्थ्य स्थिति की स्वै-निगरानी के लिए एक अंडरटेकिंग पेश करेंगे और अगर उनको कोई लक्षण हों तो प्रशासन को सूचित करेंगे। प्रवक्ता ने आगे कहा कि उनको कोवा एप डाउनलोड करने की भी ज़रूरत है, जो किर्याशील रहेगी। 
प्रवक्ता ने आखिर में कहा कि आम निगरानी के मकसद के लिए, इन दिशा-निर्देशों के अलावा भी सरकर द्वारा और ज्य़ादा व्यक्तियों की जांच कभी भी की जा सकती है। जिस तरह मोहाली और अमृतसर हवाई अड्डों और कई घरेलू यात्रियों की जांच की गई।



पुलिस कमिश्नर द्वारा छह सदस्यीय पैनल का गठन
पुलिस और मनोचिकित्सक करेंगे घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं की समस्याओं का हल

जालंधर, 25 मई:
कमिश्नरेट पुलिस द्वारा विशेष पहल करते हुए लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा का सामना कर रही महिलाओं की समस्याओं के हल के लिए टैलिफ़ोन के द्वारा ऑनलाइन काउंसलिंग हेल्पलाइन की शुरुआत की गई है। 
पुलिस कमिश्नर जालंधर श्री गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान महिलाओं पर होने वाली घरेलू हिंसा की शिकायतों में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतों के हल और महिलाओं की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए कमिश्नरेट पुलिस द्वारा अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर पुलिस डी. सुधरविजी की अध्यक्षता अधीन स्पैशल पैनल का गठन किया गया है। श्री भुल्लर ने बताया कि सब इंस्पेक्टर रैंक की महिला पुलिस अधिकारी मोनिका अरोड़ा द्वारा दो अन्य सहायक सब इंस्पेक्टरों आशा किरण और सुमन बाला के साथ पैनल की देख-रेख की जाएगी। 
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि तीन पुलिस अधिकारियों के साथ मनोरोग माहिर डॉ. जसबीर कौर, डॉ. सरबजीत सिंह और राजबीर कौर द्वारा शिकायतकर्ता महिलाओं के साथ बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान शिकायतकर्ता तक पहुँच बनाकर मामले की पड़ताल करना संभव नहीं है, इसलिए कमिश्नरेट पुलिस द्वारा यह फ़ैसला लिया गया है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि यदि किसी महिला द्वारा कमिश्नरेट पुलिस के पास अपनी समस्या सम्बन्धी शिकायत की जाती है, तो पैनल की तरफ से उसके साथ टैलिफ़ोन पर संपर्क किया जाएगा। 
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पैनल द्वारा कॉन्फ्ऱेंस कॉल के द्वारा पीडि़त महिला की काउंसलिंग करके उसकी समस्या का हल ढूँढा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि पीडि़त महिला काउंसलिंग से संतुष्ट नहीं होती और अपने लिए कानूनी मदद चाहती है, तो कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन काउंसलिंग हेल्पलाइन का मुख्य मंतव्य घरेलू हिंसा में न्याय प्राप्त करने के लिए महिलाओं को सुविधा प्रदान करना है। 


‘सभी छप्पड़ों को क्रमवार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में तबदील किया जाएगा’

चंडीगढ़, 25 मई:
पंजाब के गाँवों के छप्पड़ों को साफ़ करने की शुरु की गई मुहिम के तहत अब तक की उपलब्धियों पर तसल्ली प्रकट करते हुए राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने विभाग के अधिकारियों और पंचायतों को इस मुहिम में और तेज़ी लाने के लिए कहा है, जिससे यह कार्य हर हालत में 10 जून तक मुकम्मल किया जा सके।
श्री बाजवा ने कहा कि 11 मई को शुरू की गई इस मुहिम के अंतर्गत राज्य भर में 12451 छप्पड़ों में से अब तक 3848 का पानी निकाला जा चुका है, जबकि 4500 छप्पड़ों में से पानी निकालने का काम चल रहा है, जो आने वाले दो या तीन दिनों में मुकम्मल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य के 297 छप्पड़ों से कीचड़ निकाल कर साफ़ किए जा चुके हैं और 1304 छप्पड़ों में से कीचड़ निकालने का काम जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के अनुसार राज्य के 12451 छप्पड़ों में से पानी निकालने की ज़रूरत है, जबकि 7649 छप्पड़ों में कीचड़ भी निकालने की ज़रूरत है।
ग्रामीण विकास मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को हिदायत दी कि राज्य के बाकी बचे 4103 छप्पड़ों में से पानी निकालने का काम तुरंत चालू करवाया जाए, जिससे 10 जून तक राज्य का एक भी छप्पड़ साफ़ होने से न रह जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कीचड़ निकालने के काम में गाँव के कामगारों से करवाया जाए, जिससे उनको इस संकट की घड़ी में काम मिल सके।
ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि राज्य के गाँवों के वातावरण को साफ़-सुथरा और सेहतमंद बनाने के लिए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा थाप्पर यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार करवाए गए किफ़ायती मॉडल के अनुसार पंजाब के सभी छप्पड़ों को क्रमवार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि गाँवों का गंदा पानी इन प्लांटों के द्वारा साफ कर किसानों को सिंचाई के लिए मुहैया करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग इस मान्यता को भी सिद्ध करने की कोशिश में है कि सफ़ाई में ही खुदाई है।
इसी दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के वित्तीय कमिश्नर सीमा जैन ने बताया कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को एक-एक जि़ले का इंचार्ज बनाकर छप्पड़ों की सफ़ाई की मुहिम पूरे योजनाबद्ध तरीके से चलाई जा रही है। उन्होंने भरोसा प्रकट किया कि विभाग के अधिकारियों, गाँवों की पंचायतों और लोगों के सहयोग के साथ यह बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य समय पर निपटा लिया जाएगा।  
यहाँ यह वर्णनयोग्य है कि राज्य के ग्रामीण विकास विभाग ने तंदुरुस्त पंजाब मिशन के सहयोग के साथ वर्षा ॠतु शुरू होने से पहले-पहले पंजाब के सभी छप्पड़ों में से पानी और कीचड़ निकाल कर साफ़ करने के बाद इनमें साफ़ पानी डालने की मुहिम शुरु की हुई है।


कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा डिप्टी कमीशनरों और पुलिस को यकीनी बनाने के आदेश

चंडीगढ़, 24 मई:
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने समूह डिप्टी कमीशनरों और जि़ला पुलिस मुखियों को यह यकीनी बनाने की हिदायत की कि कोई भी प्रवासी कामगार घर वापसी मुल्क के किसी अन्य राज्य को पैदल चल कर जाने या पंजाब में होते भूखे पेट रहने के लिए मजबूर न हो। उन्होंने कहा कि सभी प्रवासी मज़दूरों के गृह राज्यों में सुरक्षित पहुँच यकीनी बनाना उनकी सरकार की जि़म्मेदारी बनती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि डिप्टी कमीशनरों और पुलिस अधिकारियों को आदेश दिए कि यदि किसी भी प्रवासी के सडक़ पर चले जाते का पता लगे तो उसे नज़दीक की जगह पर छोडऩा चाहिए जहाँ वह अपने गृह राज्य के लिए रेलगाड़ी या बस ले सके, चाहे 300वीं विशेष श्रमिक रेल प्रवासी मज़दूरों को लेकर उत्तर प्रदेश की तरफ रवाना हो गई है। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत की कि उनको पंजाब छोडऩे तक भोजन और पानी मुहैया करवाना चाहिए।
प्रवासियों को न घबराने की अपील करते हुये मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि राज्य सरकार गृह राज्यों में वापसी के इच्छुक हर प्रवासी की सहायता करेगी और उनकी मुफ़्त यात्रा और भोजन का भी बंदोबस्त करेगी।
‘संकट में हर व्यक्ति का ध्यान रखने ’ के प्रति राज्य की वचनबद्धता को दिखाते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रवासियों को हमारे सहयोगी भारतीय बताया जो राज्य और यहाँ की आर्थिकता में योगदान डालते हैं।
प्रवासियों से रूबरू होते हुये मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पंजाब आपकी कर्म भूमि है, चाहे यह आपकी जन्म भूमि न भी हो।’’ कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रवासी को अपने गृह राज्य में वापसी करने का कठिन रास्ता पैदल चल कर तय करने की कोशिश न करने की अपील की है क्योंकि राज्य सरकार उनके सफऱ के लिए रेल और बसें समेत सभी ज़रुरी प्रबंध कर रही है।
मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि पंजाब से बाहर जाने के लिए राज्य के पोर्टल पर अब तक 10 लाख से अधिक व्यक्ति नाम दर्ज करवा चुके हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार रजिस्टर्ड हो चुके सभी व्यक्तियों की प्रामाणिकता की व्यापक कवायद आरंभ की हुई है और हर व्यक्ति को फोन कॉल करके दोबारा पता लगाया जा रहा है कि क्या वह अपने गृह राज्य में वापसी करन के इच्छुक हैं या नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह इस तथ्य के मद्देनजऱ किया जा रहा है कि पिछले 3-4 दिनों से राज्य में दो तिहाई औद्योगिक इकाईयों ने बन्दिशों में ढील देने के बाद काम शुरू कर दिया है जिस के उपरांत पंजाब से बाहर जाने के इच्छुक व्यक्तियों की संख्या में बड़ी कमी आई है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इसको स्वागती संकेत करार दिया।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार तब तक सम्बन्धित राज्यों के लिए रेलगाडिय़ांं चलाए जाने को जारी रखेगी जब तक इन लोगों की तरफ से अपने राज्यों को जाने की इच्छा अभिव्यक्त की जायेगी। मुुख्यमंत्री ने साथ ही कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से अपने गृह राज्यों को वापस जाने के इच्छुक प्रवासी कामगारों को वापस भेजने के लिए खाना और यात्रा की सुविधा मुफ़्त मुहैया करवाने के लिए अप्रैल के अंत में लिए फ़ैसले के बाद इन कामगारों को सम्बन्धित राज्यों को भेजने के लिए मुफ़्त यात्रा की सुविधा के लिए राज्य सरकार पहले ही रेलवे को 20 करोड़ की अदायगी कर चुकी है।
मुख्यमंत्री ने सांझा किया कि आज 300वीं श्रमिक रेलगाड़ी पटियाला से शाम 5 बजे उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रविवार तक पंजाब के अलग-अलग जिलों से अलग -अलग राज्यों जिनमें दक्षिणी भारतीय और उत्तर -पूर्वी राज्य भी शामिल हैं, के लिए 311 श्रमिक रेलगाडिय़ों के द्वारा 3.90 लाख प्रवासी कामगारों को भेजा जा चुका है।
पंजाब में प्रवासी कामगारों को उनके घर से लेकर रेलवे स्टेशनों तक सरकारी बसों के द्वारा यातायात की मुफ़्त सुविधा दी जा रही है। राज्य सरकार की तरफ से सरकारी बसों के द्वारा प्रवासी कामगारों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों तक बिना किराया वसूले भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कि राज्य हैडक्वाटर और जिलों में तैनात पंजाब के अधिकारियों की तरफ से प्रवासियों को सुचारू ढंग से उनके गृह राज्यों तक पहुँचाने के लिए श्लाघायोग्य काम किया गया है।
इसी समय पंजाब सरकार की तरफ से दूसरे राज्यों में फंसे पंजाबियों को वापस पंजाब लाने के लिए पूरा सहयोग दिया जा रहा है और जहाँ यात्रा के लिए वित्तीय सहायता की ज़रूरत पड़ती है, वहां मुहैया करवाई जा रही है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ से उम्मीद जताई गई कि दूसरे राज्यों, जहाँ हमारे लोग फंसे हुए हैं, की सरकारें इनको यातायात की सुविधा मुहैया करवाने की जि़म्मेदारी निभाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन की तरफ से पहले ही इस सम्बन्धी सम्बन्धित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सभी पंजाबियों की मातृ भूमि है और उनको वापस लाना हमारा फज़ऱ् है।
कोविड -19 के डर के कारण इस सम्बन्धी पैदा हो रहे सरोकारों को दरकिनार करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पंजाब में वायरस को और बढऩे से रोकने के लिए आने वाले ऐसे यात्रियों के एकांतवास और टेस्टिंग के लिए स्पष्ट नियम पहले ही अमल में लाए जा रहे हैं।

CM के निर्देशों पर 3,95,000 प्रवासी कामगारों को विशेष रेलगाडिय़ों के द्वारा उनके पैतृक राज्य वापस भेजा गया

चंडीगढ़, 24 मई:
आज पटियाला से 300वीं रेलगाड़ी रवाना होने के साथ पंजाब सरकार द्वारा कैप्टन अमरिन्दर सिंह के निर्देशों पर अब तक 3,95,000 से अधिक प्रवासी मज़दूरों को उनके पैतृक राज्यों को वापस जाने की सुविधा दी गई है। 
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए नोडल अधिकारी विकास प्रताप ने बताया कि आज कुल 23 रेलगाडिय़ाँ चल रही हैं, जिसके साथ ही प्रवासी कामगारों को लेकर जाने वाली रेलगाडिय़ों की कुल संख्या 311 हो गई है, और पंजाब इस सम्बन्ध में अग्रणी राज्य बन गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रवासी कामगारों को उनके पैतृक राज्य वापस जाने की सुविधा देने के लिए अब तक 21.8 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
डिप्टी कमिश्नर कुमार अमित द्वारा पटियाला से हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई 300वीं रेलगाड़ी प्रवासी कामगारों को उत्तर प्रदेश में उनके घर लेकर जाएगी। 
उन्होंने कहा कि हम यह यकीनी बना रहे हैं कि अपने पैतृक राज्यों को वापस जाने की इच्छा रखने वाले प्रवासी कामगारों को बिना किसी मुश्किल के जल्द से जल्द उनके परिवारों से मिलाया जाए। नोडल अधिकारी विकास प्रताप ने कहा कि मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य सरकार हमारे मेहमान कर्मचारियों को हर तरह की राहत और सहायता प्रदान करने के लिए 24 घंटे काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह कार्य डिप्टी कमिश्नरों और फिऱोज़पुर एवं अम्बाला डिविजऩ के रेलवे अधिकारियों के सहयोग के साथ पूरा किया जा रहा है। 
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस संकट के शुरू में ही राज्य में काम कर रहे सभी प्रवासियों को भरोसा दिया था कि हर कोई जो अपने गृह राज्य में वापस जाना चाहता है, को हर तरह की सहायता और सहयोग दिया जाएगा।
कुल 311 में से उत्तर प्रदेश के लिए सबसे अधिक 204 रेलगाडिय़ाँ और उसके बाद बिहार को 82 रेलगाडिय़ाँ प्रवासी कामगारों को लेकर रवाना हुई हैं। इसी तरह झारखंड को 9, मध्य प्रदेश को 7 और छत्तीसगढ़ और पश्चिमी बंगाल को 2-2 रेलगाडिय़ाँ रवाना हुई हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मनीपुर, तमिलनाडु और उत्तराखंड के लिए एक-एक रेलगाड़ी प्रवासी मज़दूरों को लेकर रवाना हुई है।
प्रवासी मज़दूरों की मुश्किलों को कम करने के लिए राज्य द्वारा हर संभव सहायता प्रदान करने की वचनबद्धता का भरोसा देते हुए उन्होंने कहा कि घर वापस जाने वाले सभी लोगों को उनके सफऱ के लिए भोजन, पानी और अन्य ज़रूरी चीज़ें भी प्रदान की जा रही हैं।
इसके अलावा, इन सभी राज्यों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो प्रवासियों की उनके गृह राज्यों तक सुरक्षित वापसी की सुविधा के लिए अन्य राज्यों में अपने समकक्ष के साथ सक्रियता से संपर्क में हैं, और प्रवासियों की ज़रूरी चिकित्सा जांच के लिए डिप्टी कमिश्नरज़ स्तर पर टीमों का गठन किया गया है। 

चंडीगढ़, 23 मई:
पंजाब सरकार ने राज्य के सभी वाहन मालिकों के लिए अपने वाहनों पर उच्च सुरक्षा रजिस्ट्रेशन प्लेटों (एचएसआरपी) लगाने की समय सीमा 30 जून, 2020 तक बढ़ा दी है। इन प्लेटों को लगाने सम्बन्धी सभी वाहन मालिकों के लिए यह आखिऱी मौका होगा और इसके बाद तारीख़ में विस्तार नहीं किया जाएगा। इसका खुलाया आज यहाँ परिवहन मंत्री श्रीमती रजिय़ा सुल्ताना द्वारा जारी एक प्रैस बयान में किया।
परिवहन मंत्री ने कहा कि भारत में सभी वाहनों को उच्च सुरक्षा रजिस्ट्रेशन प्लेटें (एचएसआरपी) लगाना लाजि़मी है। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और भारत सरकार एवं पंजाब सरकार के नोटीफिकेशनों के मद्देनजऱ पंजाब सरकार ने उन वाहन मालिकों को 30 जून, 2020 तक उच्च सुरक्षा रजिस्ट्रेशन प्लेटों (ऐचऐसआरपी) को लगवाने का आखिऱी मौका दिया है, जिन्होंने यह प्लेटें नहीं लगवाईं। 
श्रीमती रजिय़ा सुल्ताना ने बताया कि जि़ला मुख्यालय में मौजूदा समय में 22 फिटमेंट सैंटरों के अलावा सब-डिविजऩल स्तर पर 45 और फिटमेंट सैंटर स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए और कोविड-19 की रोकथाम के लिए देह से दूरी के नियमों को ध्यान में रखते हुए वाहन मालिकों को फिटमेंट सैंटरों में जाकर अपनी बारी का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। एक मोबाइल एप्लीकेशन ॥स्क्रक्क क्कहृछ्व्रक्च के अलावा वैबसाइट 222.क्कह्वठ्ठद्भड्डड्ढद्धह्यह्म्श्च.द्बठ्ठ के द्वारा वाहन मालिकों की सुविधा और फ़ीसों की अदायगी के अनुसार मुलाकात की पूर्व-बुकिंग की एक ऑनलाइन प्रणाली चालू की गई है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अप्रैल, 2019 से निर्मित वाहनों की एच.एस.आर.पी. सम्बन्धी एजेंसियों से लगाई जानी है, जहाँ से वाहन खऱीदे गए हैं।
मंत्री ने आगे कहा कि जनता की सुविधा के लिए और शोषण को रोकने के लिए घर में एच.एस.आर.पी. की सुविधा भी मुहैया करवाई गई है। यह सुविधा वैकल्पिक है, जिसके अंतर्गत वाहन मालिक यह सुविधा 2 और 3 पहिया वाहन के लिए 100/- रुपए और चार पहिया वाहनों के लिए 150/- रुपए का अतिरिक्त भुगतान करके प्राप्त कर सकते हैं।
इस सम्बन्धी किसी भी पूछताछ के लिए वाहन मालिकों के मार्गदर्शन के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 7888498859 और 7888498853, और द्गद्वड्डद्बद्य.ष्ह्वह्यह्लशद्वद्गह्म्.ष्ड्डह्म्द्गञ्चद्धह्यह्म्श्चश्चह्वठ्ठद्भड्डड्ढ.ष्शद्व दिए गए हैं।
एच.एस.आर.पी. संबंधी और ज्य़ादा जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री ने कहा कि इसमें नीले रंग में अशोक चक्र का एक क्रोमियम-आधारित होलोग्राम ऊपरी-बाएं कोने पर लगाए गए हैं। नीचे-बांये कोने पर 10-अंक का स्थाई पहचान नंबर (पिन) लेजऱ के साथ लिखा जाता है। चक्र के होलोग्राम और लेजऱ कोड के मध्य में च्ढ्ढहृष्ठज् नीले रंग में लिखा हुआ है। एक बार जब एच.एस.आर.पी. आपके वाहन के साथ जुड़ जाता है, तो रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ-साथ ङ्क्र॥्रहृ एप्लीकेशन पर पिन इलैक्ट्रॉनिक्स ढंग से आपके वाहन के साथ जोड़ दिया जाएगा। एच.एस.आर.पी. का लाभ यह है कि यह ग़ुम हुए या चोरी हुए वाहनों को ट्रैक करने में सहायता करता है।

bttnews

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