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 हाथरस गैंगरेप घटना की जांच के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई, टीम ने 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी,  सीएम ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई के निर्देश भी दिए। 



Chandigarh, September 29: The Punjab Government has decided to postpone the departmental examination of IAS/PCS and other departments in Punjab due to COVID-19. The test will now be held from 23.11.2020 to 27.11.2020 without any change in the schedule and pattern of the datesheet as mentioned in the advertisement No. PERS- PCSOD/E/2/2019-2PCS/440 dated 21.8.2020. The Spokesperson of the Punjab Government said that the department of Personnel (PCS Branch) have issued a letter in this regard in which it’s made clear that the candidates who have already applied need not to apply again. However, applications from all those who have not applied yet may apply till 20.10.2020 through proper channel. Other terms and conditions will remain same as mentioned in advertisement.Earlier departmental examination of officers of different Departments of Punjab was scheduled to be held from 05.10.2020 to 09.10.2020 at Mahatma Gandhi State Institute of Public Administration, Punjab, Sector-26, Chandigarh.

 

 1. रुबीना दिलैक - रुबीना शक्ति जैसे शो में भी नजर आई थी।  बाद में कई सीरियल को छोड़कर शादीशुदा जिंदगी में व्यस्त हो गई थी। अब बिग बॉस-14 में दिखेगी।

2. अभिनव शुक्ला - अभिनव शुक्ला रुबीना के पति हैं और जर्सी नंबर 10 नाम के शो में काम कर चुके हैं।
3. शार्दुल पंडित - बंदिनी, कुलदीपक जैसे शो में शार्दुल पंडित नजर आ चुके हैं।

4. शहजाद देओल - शहजाद देओल रियलिटी शो ऐस ऑफ स्पेस और टॉप मॉडल इंडिया में दिख चुके हैं।


5. जिया मानेक -  साथ निभाना साथिया की गोपी बहू अब बिग बॉस में दिखाई देंगी।

6 जैस्मिन भसीन - जैस्मिन भसीन रश्मि देसाई और सिद्धार्थ शुक्ला के साथ दिल से दिल तक में थी।

7. निशांत सिंह मकलानी - निशांत ने गुड्डन तुमसे न हो पाएगा, मिले जब हम तुम, जैसे सीरियल में काम कर चुके हैं।

8 पवित्रा पुनिया - कई सीरियल्स में निगेटिव किरदार के कारण चर्चा में रही है। 

9. ऐजाज खान - एकता कपूर के कई सीरियल्स में कई  काम चुके हैं। 

10. राहुल वैद्ध - पेशे के सिंगर है इंडियन आइडल के पहले सीजन के रनर-अप रहे हैं और कई सारे म्यूजिक एलबम लांच कर चुके हैं।

11. जान कुमार सानू - मशहूर पार्श्व गायक कुमार सानू के बेटे हैं ।

12. सारा गुरपाल - सारा गुरपाल कई पंजाबी फिल्मों और म्यूजित वीडियो में नजर आ चुके हैं। 

13. निक्की ताम्बोली - ये साउथ फिल्म एक्ट्रैस हैं और कई तमिल और तेलुगु फिल्मों में काम कर चुकी है। 

इस सभी के अलावा शगुन पांडेय, एक्ट्रेस नेहा शर्मा, प्रतीक सहजपाल, नैना सिंह, राधे मां, व शुभांगी अत्रे भी बिग बॉस-14  का हिस्सा बन सकते हैं।

नइ दिल्ली: राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने रविवार को तीनों विवादपूर्ण कृषि बिलों को अपनी सहमति दे दी है।विरोधी पार्टियों का कहना है कि यह बिल किसान विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थकीय हैं,  हाल ही में संसद की तरफ से विरोध के बावजूद इन बिलों को के पास किया गया। सरकार का कहना है कि यह बदलाव महत्वपूर्ण है और किसानों को स्व -निर्भर बनाएगी। परन्तु एक दर्जन से अधिक विरोधी पार्टियों ने राष्ट्रपति कोविन्द को विवादपूर्ण बिलों पर दस्तखत न करने की अपील की थी। जिस में यह दोश लगाया गया था कि बिल कथित तौर पर संसद के नियमों की पूरी तरह अनदेखी करते हुए "ग़ैर -संवैधानिक तरीके से पास किया गए हैं। इन बिलों का विरोध इतना था कि शिरोमणि अकाली दल ने विवादपूर्ण कृषि बिलों की परवानगी को लेकर केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले नेसनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) गठबंधान से भी अपना नाता तोड़ लिया।

कहा, सांपला के बयान ने अकाली दल द्वारा किसानों को गुमराह करने की कोशिश की पोल खोली

चंडीगढ़ 26 सितंबर

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री सुनील जाखड़ ने कहा है कि शिरोमणि अकाली दल के इस झूठ कि उन्हें मोदी सरकार द्वारा. कृषि कानूनों संबंधी अंधेरे में रखा गया था, का पर्दाफाश उनके ही पुराने भागीदारों ने कर दिया है ।आज यहां से जारी बयान में श्री सुनील जाखड़ ने कहा कि भाजपा नेता विजय सांपला के ताजा बयान ने अकाली दल की लोगों को भ्रमित करने की राजनीति का भंडा फोड़ दिया है । जिक्र योग्य है कि श्री सांपला ने अपने एक बयान में कहा था कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने खेती कानूनों के मुद्दे पर पंजाब के किसानों को समझाने की जिम्मेवारी अपने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल की लगाई थी और अकाली दल के नेता यह फर्ज निभाने में असमर्थ रहे हैं। इस बयान पर टिप्पणी करते हुए श्री सुनील जाखड़ ने कहा कि भाजपा नेता के इस बयान ने अकाली दल के झूठ को बेनकाब कर दिया है जिसके द्वारा वे कह रहे थे कि केंद्र सरकार ने काले कृषि कानूनों व ऑर्डिनेंस के बारे में पहले उन्हें कोई जानकारी नहीं दी थी उन्होंने कहा कि अगर भाजपा ने पंजाब के किसानों को इन कानूनों के मुद्दे पर समझाने या सही अर्थों में कहा जाए तो गुमराह करने की जिम्मेवारी ही अकाली दल को दी थी तो फिर यह कैसे हो सकता है कि उनको इन काले कानूनों के बारे में विस्तार से बताया न गया हो। उन्होंने कहा कि असल में अकाली दल का नेतृत्व पंजाब में भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रहा है जो किसानों को गुमराह करने की कोशिश में लगा हुआ है और अब वे किसान आंदोलन को कमजोर करने के लिए इस में  घुसपैठ की नाकाम कोशिश कर रहे हैं ताकि उन पर केंद्र सरकार की कृपा दृष्टि बनी रहे ।श्री जाखड़ ने कहा कि यह सच भी है क्योंकि पिछले 3 महीने से श्री सुखबीर सिंह बादल और श्रीमती हरसिमरत कौर बादल समेत पूरी अकाली लीडरशिप इन काले कानूनों को किसानों के लिए वरदान बता रहे थे। उन्होंने कहा कि जब पंजाब के  किसान अकाली दल के झूठ के झांसे में नहीं आए तो फिर भाजपा ने खुद ही जान लिया कि किसान के नाम पर राजनीति करने वाले अकाली दल का तो अपना कोई आधार किसानों में नहीं है, इसलिए भाजपा ने अकाली दल को गठबंधन पर बोझ समझते हुए उसे मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिसे शर्म के मारे अकाली दल अब त्यागपत्र की कुर्बानी का नाम दे रहा हैं जब कि केंद्र सरकार की कृपा दृष्टि प्राप्त करने की इच्छा में अकाली दल अभी भी मोदी सरकार को समर्थन जारी रखे हुए हैं जो कि प्रमाणित करता है कि वे आज भी मोदी सरकार के एजेंट बने हुए हैं।


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बादलों की लोगों के सामने ड्रामेबाज़ी की कड़ी आलोचना, कहा ऐसी हरकतों से अकालियों को कोई भी फ़ायदा नहीं पहुंचेगा

चंडीगढ़, 25 सितम्बर:

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि कृषि बिलों के खि़लाफ़ कोविड और अत्यंत गर्मी की परवाह न करते हुए रोष-प्रदर्शन करने वाले किसानों का दर्द केंद्र सरकार तक पहुँचेगा और वह कृषि क्षेत्र की जरा सी भी फिक्र न करते हुए उसे तबाही के जिस रास्ते पर डालने पर तुली है, उससे गुरेज़ करेगी।मुख्यमंत्री ने किसानों और कृषि क्षेत्र जोकि पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है, के साथ जुड़े किसानों की हालत पर गहरी चिंता ज़ाहिर करते हुए आगे कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की तरफ से बुरी मानसिकता के साथ तैयार किये असंवैधानिक कृषि कानूनों ने किसानों को हाशिये की तरफ धकेल दिया है जिस कारण वह कोविड महामारी के दौरान सडक़ों पर आकर अपनी जि़न्दगियां खतरे में डालने पर मजबूर हो गए हैं।मुख्यमंत्री ने उम्मीद ज़ाहिर की, ‘शायद पंजाब और कई अन्य राज्यों में सैंकड़े ही स्थानों पर हज़ारों की संख्या में रोष-प्रदर्शन कर रहे किसानों की बुरी हालत देख कर केंद्र सरकार का दिल पिघल जाये।’ उन्होंने आगे कहा कि शायद अब भारतीय जनता पार्टी को गलती का एहसास होगा।अपने आखिरी साँसों तक इन काले कानूनों का डट कर विरोध करने की वचनबद्धता को दोहराते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने भारत के राष्ट्रपति से अपील की कि इन बिलों पर मंज़ूरी की मोहर न लगाई जाये। यह कानून बनाऐ ही इसलिए गए हैं जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया जा सके और देश की अनाज सुरक्षा को खतरे में डाला जाये जिससे लाखों ही किसानों और उनके परिवारों के अलावा अपने गुज़ारे के लिए कृषि खाद्य श्रंखला पर निर्भर करते लोगों को परेशानियों का सामना हो सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह बिल लागू हो गए तो इनसे सरहदी राज्य पंजाब के लिए बहुत बुरे परिणाम निकलेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार पर पूँजीवादी ताकतों के हितों की पूर्ति के लिए किसानों की चिंताओं को अनदेखा करने का दोष भी लगाया।मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार और पंजाब कांग्रेस की तरफ से इन बिलों का विरोध करने के लिए किसानों के साथ कंधे से कंधा जोड़ कर खड़ा जायेगा और अदालतों में जाने समेत जो भी कदम ज़रूरी हों, वह उठाये जाएंगे जिससे राज्य के मज़बूत कृषि नैटवर्क को तोड़-फोड़ केंद्र सरकार के ख़तरनाक मंसूबों पर नकेल डाली जा सके।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अकालियों पर भी तीखे हमले करते हुए कहा कि उनकी तरफ से इन बिलों सम्बन्धी लोगों के सामने सिफऱ् नाटक ही किया जा रहा है जिसको किसान भी पूरी तरह समझते हुए मगरमच्छ के आंसू बहाने के आरोप लगा चुके हैं। सुखबीर बादल और हरसिमरत बादल की तरफ से उन (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) पर हमले करने पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने इसको एक ऐसा पैंतरा बताया जिससे इन दोनों की तरफ से किसानों के हितों की रक्षा करने में नाकाम रहने और कृषि आर्डीनैंसों की पूरी हिमायत करके केंद्र सरकार में बेशर्मी के साथ हिस्सेदार बने रहने जैसे शर्मनाक कामों से लोगों का ध्यान हटाया जा सके।उन्होंने कहा कि अकालियों की तरफ से अपनाए जाते दोहरे मापदण्डों का पूरी तरह पर्दाफाश हो गया है जोकि उनके केंद्र के किसान विरोधी सत्ताधारी गठजोड़ का हिस्सा बने रहने से साफ़ ज़ाहिर होता है। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि अकाली अभी तक केंद्र सरकार की सार्वजनिक तौर पर आलोचना करने से इन्कारी हैं। हरसिमरत बादल की तरफ केंद्रीय मंत्रालय में से इस्तीफ़ा देने का यह नाटक शिरोमणि अकाली दल की संजीदगी का किसानों को एहसास करवाने के लिए अपर्याप्त है।केंद्र पर काबिज़ सत्ताधारी गठजोड़ एन.डी.ए. में से बाहर आने से लगातार इंकार करने के लिए सुखबीर बादल पर सवाल खड़े करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों के हत्थकंडों से पंजाब के किसान पूरी तरह अवगत हो चुके हैं और अकालियों को अब इस ड्रामे से कोई भी लाभ लेने की इजाज़त नहीं देंगे।

चंडीगढ़: 

सोशल मीडिया और एक ख़बर बहुत तेज़ी के साथ वायरल हो रही है। इस ख़बर में दावा किया जा रहा है कि पंजाब में इंटरनैट सर्विस बंद होगी।


इस ख़बर की जांच करन के बाद पता लगा है कि इस में कोई सच्चाई नहीं है। वायरल होने के कारण पंजाब सरकार ने भी स्पष्टीकरण दिया है। जिसमें कहा गया है कि इन्टरनेट बंद होने की झूठी खबरें सोसल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। सरकार की तरफ से इंटरनैट सर्विस बंद करने का कोई फ़रमान जारी नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने टवीट करके बताया है कि पंजाब में इन्टरनेट सेवाएं बंद करने का ऐलान नहीं किया गया। कृपया सोशल मीडिया पर चल रही अफ़वाहों' पर विस्वास न करो।

चंडीगढ़, 24 सितम्बर:

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने का भरोसा देते हुये पंजाब के वित्त मंत्री स. मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि किसान विरोधी कृषि बिलों के खि़लाफ़ वह आखिऱी दम तक लड़ेंगे। आज यहाँ प्रैस कॉन्फ्ऱेंस के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि आर्डीनैंस, जो हाल ही में संसद में पास किये गए हैं, का मुख्य मकसद किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) के सुरक्षा कवच से वंचित करना और देश के अन्नदाता को बर्बाद करना है।


उन्होंने कहा कि यह बिल केवल किसानों को ही नहीं बल्कि सभी पंजाबियों को बुरी तरह प्रभावित करेंगे। संकट की इस घड़ी में सभी पंजाबियों को समझदारी से काम लेने की अपील करते हुये स. बादल ने कहा कि पंजाबियों को सख़्त मेहनत और किसी भी जबर, अन्याय और बेइन्साफ़ी के खि़लाफ़ संघर्ष में निर्भिक रहने का वरदान है। किसानों के हितों को नुकसान पहुँचाने वाले कदमों को कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे और पंजाब सरकार की तरफ से भाजपा की अगवाई वाली केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों का डट कर विरोध करेगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसी को भी किसानों के हितों को नुकसान पहुँचाने की आज्ञा नहीं दी जायेगी। स. मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि यह कृषि बिल किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में मिले सुरक्षा कवर से वंचित कर देंगे। उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में मोदी सरकार की तरफ से गेहूँ के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 50 रुपए की वृद्धि का ऐलान किया गया है, जोकि पिछले एक दशक का सबसे कम (केवल 2.6 प्रतिशत) है। उन्होंने कहा कि कृषि लागत और मूल्य कमीशन (सी.ए.सी.पी.) ने खाद्य वस्तुओं की 8.4 प्रतिशत महँगाई के मद्देनजऱ न्यूनतम समर्थन मूल्य में 6 प्रतिशत वृद्धि की सिफ़ारिश की थी। इससे संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने से पैर पीछे खींच रही है। किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की महत्ता पर रौशनी डालते हुये वित्त मंत्री ने कहा कि अन्नदाता की भलाई यकीनी बनाने के इलावा एम.एस.पी. राज्य के विकास का अहम ज़रिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में हर साल 70,000 करोड़ रुपए के अनाज की खरीद होती है, जिससे राज्य को 3900 करोड़ रुपए सालाना मंडी फीस मिलती है। इस राशि से राज्य की 65000 किलोमीटर लिंक सडक़ोंं, पुलों, मंडियों और अन्य बुनियादी ढांचे की संभाल और मुरम्मत की जाती है। भाजपा सरकार के पंजाब विरोधी पैंतरों की तीन उदाहरणों का हवाला देते हुये वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाब को हमेशा केंद्र के इस सौतले रवैये का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्यों को विशेष टैक्स रियायतें देने, जीएसटी लागू करने और अब इन कृषि बिलों ने पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है। स. बादल ने कहा कि यह उससे बड़ा सितम है कि इन पंजाब विरोधी नीतियों में शिरोमणि अकाली दल हमेशा भाजपा का हिमायती रहा है। इस मुद्दे पर मगरमच्छ के अश्रु बहाने वाले शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की कड़े शब्दों में निंदा करते हुये वित्त मंत्री ने कहा कि सुखबीर लोगों को जवाबदेह है कि वह क्यों भाजपा के हर पंजाब विरोधी पैंतरों में हिस्सेदार हैं? उन्होंने कहा कि हरसिमरत कौर बादल ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खि़लाफ़ एक शब्द तक नहीं बोला। वित्त मंत्री स. बादल ने कहा कि सुखबीर याद रखे कि ऐसे भावुक मुद्दे पर या तो प्रधानमंत्री के पावोंं में गिर जाये या फिर कड़े विरोध पर तत्पर हो जाएँ। आप सिफऱ् किसानों के हक में होने का ढकोसला रच रहे हो।वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस हमेशा पंजाब और पंजाबियों के हितों की रक्षा के लिए वचनबद्ध है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान राज्य के पानियों की रक्षा की और अब किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है और ज़रूरत पडऩे पर हर संभव कदम उठाऐंगे। स. बादल ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही किसानी विरोधी कृषि बिलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। वित्त मंत्री ने कहा कि जहाँ राज्य में हरियाली और सफ़ेद क्रांति लाने में कांग्रेस सरकार की मुख्य भूमिका रही है, वहीं अकाली -भाजपा गठजोड़ ने हमेशा शान्ति, ख़ुशहाली और राज्य की तरक्की को रोक लगायी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य के किसानों के भलाई के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। स. बादल ने कहा कि यह उचित समय है जब पंजाबियों को पंजाबी समर्थकीय और पंजाबी विरोधी ताकतों के बीच वाले अंतर पहचानना पड़ेगा। केंद्र सरकार की तरफ से बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी के विवरण मीडिया को जारी करते हुये वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी केंद्र सरकार की तरफ से किसानों की आमदन दोगुनी करने के लिए कायम की गई थी। पहली मीटिंग में पंजाब को बुलाया ही नहीं गया परन्तु जब पंजाब की तरफ से कमेटी से बाहर रखने के कदम का विरोध किया गया तो राज्य को कमेटी में शामिल कर लिया गया। स. बादल ने कहा कि दूसरी और तीसरी मीटिंग में कृषि आमदन बढ़ाने के इलावा किसी एजंडे पर विचार-विमर्श नहीं किया गया।

जैसलमेर के पोकरण से भटिंडा जा मिनी ट्रक जोधपुर के बाप थाना क्षेत्र में तलाशी अभियान के दौरान पकड़ा 

जोधपुर

पंचायत चुनावों के दौरान अवैध शराब व मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान जोधपुर ग्रामीण  पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी। पुलिस ने बाप थाना क्षेत्र में तलाशी अभियान के दौरान एक मिनी ट्रक से 45 लाख रुपए बरामद किए। मिनी ट्रक चालक यह राशि पोकरण से पंजाब के भटिंडा लेकर जा रहा था। पोकरण से बड़ी राशि के इस तरह भेजे जाने को लेकर खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए है और वे भी इसके तार तलाशने में जुट गई है। माना जा रहा है कि यह राशि मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी है। पुलिस अधीक्षक जोधपुर ग्रामीण राहुल बारहठ ने बताया कि इन दिनों पंचायत चुनाव के मद्देनजर जिले के सभी पुलिस थानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए मादक पदार्थों व 

शराब की तस्करी को रोकने के लिए निर्देश दिए हुए है। ऐसे में सभी थाना क्षेत्रों में वाहनों की तलाशी अभियान चल रहा है। बाप पुलिस थाना की एक टीम ने हाइवे पर वाहनों की जांच का अभियान शुरू किया। इस दौरान फलोदी की तरफ से आ रहे एक मिनी ट्रक को रोककर तलाशी लिए जाने के दौरान चालक की सीट के पीछे तीन थैलियों में रखे 44.93 लाख रुपए की नगदी बरामद की गई। पूछताछ के दौरान चालक भटिंडा निवासी जसवंत सिंह व खलासी रणदीपसिंह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इस पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया और राशि को जब्त कर लिया गया। चालक जसवंत सिंह का कहना है कि वह यह राशि पोकरण से भटिंडा लेकर जा रहा था। पंजाब में मादक पदार्थों की बढ़ती तस्करी से इसे जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल पुलिस दोनों से पूछताछ कर तस्करी की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। वहीं खुफियां एजेंसियां भी सतर्क हो गई है। वे भी इन दोनों से पूछताछ की तैयारी में है। ताकि मादक पदार्थों की तस्करी के इस नए नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

देश में पिछले 24 घंटे में  83,347 कोरोना पॉजिटिव नए मामलों और 1,085 मौतों के साथ मरीजों की संख्या 56 लाख के आंकड़े को पार कर गई।स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कुल सक्रिय मामले 9,68,377 है जबकि 45,87,614 मरीज ठीक हो चुके हैं तथा 90,020 लोगों की कोरोना के कारण मौत की पुष्टि हो चुकी है जिन्हें मिलाकर भारत देश में कुल आंकड़ा 5,646,011 पर पहुंच चुका है।

चण्डीगढ़, 22 सितम्बर:


पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने आज एक राजस्व पटवारी को 10 हज़ार रुपए की रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों काबू किया है। इस सम्बन्धी जानकारी देते हुये विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि संगरूर जिले के राम नगर सिबियां में तैनात राजस्व पटवारी सुखदेव सिंह को विजीलैंस टीम ने शिकायतकर्ता कुलविन्दर सिंह निवासी कमोमाजरा खुर्द, जि़ला संगरूर से 10 हज़ार रुपए रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों काबू किया। शिकायतकर्ता ने विजीलैंस ब्यूरो तक पहुँच की है और दोष लगाया कि उक्त राजस्व पटवारी ज़मीन के तबादले में सुधार करने के लिए 10 हज़ार रुपए की माँग कर रहा था। उसकी जानकारी की पड़ताल करने के बाद वीबी टीम ने दोषी पटवारी को दो सरकारी गवाहों की हाजिऱी में मौके पर ही शिकायतकर्ता से 10,000 रुपए रिश्वत लेते हुये गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि दोषी के खि़लाफ़ विजीलैंस ब्यूरो के थाना पटियाला में भ्रष्टाचार रोकथाम एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया गया है और अगली जांच जारी है।



 चंडीगढ़, 21 सितम्बर:

पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने आज सिटी पुलिस थाना जि़ला होशियारपुर में तैनात ए.एस.आई. दविन्दर कुमार को 4,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू कर लिया।


इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि उक्त ए.एस.आई को शिकायतकर्ता दीपक नखवाल निवासी समिति बाज़ार, होशियारपुर की शिकायत पर पकड़ा है। शिकायतकर्ता ने विजीलैंस ब्यूरो को अपनी शिकायत में बताया कि उसकी लॉटरी की दुकान पर काम करते कर्मचारी को पुलिस हिरासत में से रिहा करने के बदले उक्त ए.एस.आई द्वारा 4,000 रुपए की माँग की गई है।

विजीलैंस ने शिकायत की पड़ताल के उपरांत उक्त दोषी ए.एस.आई. को दो सरकारी गवाहों की हाजिऱी में 4,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही पकड़ लिया।

उन्होंने बताया कि दोषी के खि़लाफ़ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की अलग-अलग धाराओं के अंतर्गत विजीलैंस ब्यूरो के थाना जालंधर में मुकद्मा दर्ज करके अगली कार्यवाही आरंभ कर दी है।


केंद्र सरकार द्वारा पास कृषि संबंधी ऑर्डिनेंस के विरोध में हरसिमरत कौर बादल के आवास के समक्ष लगाया हुआ है किसानों ने मोर्चा

 

चंडीगढ़, 17 सितम्बर: कृषि विधेयकों को लेकर संसद से पंजाब के गांव तक मचे हंगामे में घिरे शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने वीरवार शाम केंद्रीय कैबिनेट से अपना इस्‍तीफा दे दिया। पार्टी के प्रधान सुखबीर सिह बादल ने लोकसभा में कृषि विधेयकों का विरोध किया और ऐलान किया कि इन विधेयकों के विरोध में हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय कैबिनेट से इस्‍तीफा देंगी। इसके बाद हरसिमरत ने अपना इस्‍तीफा दे दिया। इस्‍तीफा देने के बाद उन्‍होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उधर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने गुरूवार को हरसिमरत कौर बादल की तरफ केंद्रीय कैबिनेट में से दिए इस्तीफे को अकाली दल की तरफ से एक के बाद एक रचे जा रहे ड्रामों की एक और नौटंकी बताया। उन्होंने कहा कि कृषि बिलों पर केंद्र सरकार की तरफ से अकालियों के मुँह पर तमाचा मारने के बावजूद अकाली दल ने अभी तक सत्ताधारी गठजोड़ से नाता नहीं तोड़ा।अकाली दल की तरफ से भाजपा के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. की केंद्र सरकार का हिस्सा बने रहने के फ़ैसले पर सवाल करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि हरसिमरत का इस्तीफ़ा पंजाब के किसानों को मूर्ख बनाने के ढकोसले से अधिक और कुछ नहीं। उन्होंने कहा, ‘परन्तु वह (अकाली दल) किसान जत्थेबंदियों को गुमराह करने में सफल नहीं होंगे।उन्होंने इस कार्यवाही को अपर्याप्त और बहुत देर से उठाया कदम बताया।मुख्यमंत्री ने कहा कि हरसिमरत का केंद्रीय कैबिनेट में से इस्तीफ़ा बहुत देरी से लिया फ़ैसला है जिससे पंजाब के किसानों की किसी किस्म की मदद नहीं होनी। उन्होंने कहा कि अगर अकाली दल ने इससे पहले स्टैंड लिया होता और इन आर्डीनैंसों के विरुद्ध राज्य सरकार का समर्थन किया होता तो शायद यह बिल पास होने के हालात पैदा न होते और केंद्र सरकार को यह आर्डीनैंस लाने और किसान विरोधी बिलों को संसद में रखने से पहले 10 बार सोचना पड़ता।मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी भी अकाली दल का केंद्रीय कैबिनेट में से अपनी अकेली मंत्री का इस्तीफ़ा दिलाने के फ़ैसला का किसानों के साथ कोई सरोकार नहीं बल्कि अपनी राजनैतिक भविष्य बचाने और बादलों के छिन चुके राजसी कॅरियर को बचाने की कवायद है जिनकी साख पंजाब के लोगों की नजऱों में पूरी तरह गिर चुकी है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इन घातक कृषि आर्डीनैंसों के खि़लाफ़ मैदान में उतरे किसानों का रोष और राज्य की किसान जत्थेबंदियों का दबाव ही था जिन्होंने बादलें को अपने पहले स्टैंड से पलटने के लिए मजबूर कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘क्या सुखबीर और हरसिमरत और उनकी जुंडली ने इस बात की तरफ ध्यान ही नहीं दिया कि यह कानून पंजाब की कृषि और अर्थव्यवस्था तक किस हद तक नुक्सान पहुँचा देंगे। सत्ता की लालसा में वह इतने अंधे हो गए कि उन्होंने इन आर्डीनैंसों के खतरोंं से जानबुझ कर आँखें बंद कर ली।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने व्यंग्य करते हुये कहा कि अब इनकी सुनियोजित खेल पूरी तरह जग ज़ाहिर हो चुकी है और पंजाब में अपना वोट बैंक बचाने के लिए कृषि बिलों के विरुद्ध सार्वजनिक स्टैंड लिये बिना अकालियों के पास और कोई चारा नहीं था बचा। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने अकालियों को पहले भी नकार किया और फिर से उनको नकार देंगे।


एसएसपी डी शूडरविली की हिदायतों पर जिला श्री मुक्तसर साहिब पुलिस ने असामाजिक तत्वों पर कसा हुआ है शिकंजा

 मुख्यमंत्री द्वारा  किसानों को ट्रैफिक़ जाम न करने की अपील
 कृषि अध्यादेशों के विरुद्ध रोष प्रदर्शन दिल्ली तक ले जाने की भी अपील की

चंडीगढ़, 16 सितम्बर:

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बुधवार को किसानों से अपील की कि कृषि बिलों के विरोध में किए जा रहे रोष प्रदर्शनों में ट्रैफिक़ जाम न किया जाए और न ही धारा 144 का उल्लंघन किया जाए। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही यह स्पष्ट किया कि धारा 144 का उल्लंघन के मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा, क्योंकि वह अपनी जि़ंदगी और रोज़ी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


पंजाब कांग्रेस द्वारा कृषि विरोधी बिलों के खि़लाफ़ पंजाब के राज्यपाल को माँग पत्र देने के बाद राज भवन के बाहर पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारी किसानों के खि़लाफ़ धारा 144 का उल्लंघन के पहले ही केस दर्ज हो चुके हैं, वह वापस लिए जाएंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसान इसलिए कानून का उल्लंघन कर रहे हैं क्योंकि यह अध्यादेश उनके और उनके परिवारों को बर्बाद कर देंगे।

मुख्यमंत्री ने यह बात ज़ोर देकर कही कि राज्य कांग्रेस और राज्य सरकार किसानों के साथ है। उन्होंने कहा कि केंद्र के कानून पंजाब और कृषि को तबाह कर देंगे, जो आर्थिकता की रीढ़ की हड्डी है। उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश न्युनतम समर्थन मूल्य के ख़ात्मे का रास्ता साफ करेंगे, जो पंजाब और समूचे देश के लिए बहुत घातक सिद्ध होंगे।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने किसानों से अपील की कि वह अपने रोष प्रदर्शनों को दिल्ली केंद्र सरकार की द्वार तक लेकर जाएँ और कांग्रेस पार्टी उनको विश्वास दिलाती है कि इस संघर्ष में वह उनके साथ हैं।

लुटेरों-अपराधियों के अंतरराज्यीय गैंग के तीन मैंबर काबू, 11 अन्य की खोज जारी-डी.जी.पी.

चंडीगढ़, 16 सितम्बर:
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज ऐलान किया कि क्रिकेटर सुरेश रैना के रिश्तेदार पर हुए हमले और कत्ल केस को सुलझाने का ऐलान किया है और लुटेरों-अपराधियों के अंतरराज्यीय गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया है।
पठानकोट जि़ले में थाना शाहपुर कंडी के गाँव थर्याल में 19 अगस्त की रात को घटी घटना में गिरफ़्तारियों संबंधी विस्तार में जानकारी देते हुए डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता ने कहा कि 11 अन्य दोषियों को अभी गिरफ़्तार किया जाना बाकी है।
रैना के अंकल अशोक कुमार जो ठेकेदार थे, की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पुत्र कौशल कुमार 31 अगस्त को दम तोड़ गए और उनकी पत्नी आशा रानी दीना नाजुक हालत में अस्पताल में उपचाराधीन है। हमले में ज़ख्मी हुए दो अन्य व्यक्तियों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
इस घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने मामले की विस्तृत और तेज़ी से जांच करने के लिए आई.जी. बॉर्डर रेंज अमृतसर के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एस.आई.टी.) का गठन करने के आदेश दिए थे, जिसमें पठानकोट के एस.एस.पी., एस.पी. (इन्वेस्टिगेशन) और डी.एस.पी. धार कलाँ इसके मैंबर हैं। डी.जी.पी. ने बताया कि जांच के दौरान एस.आई.टी. ने केस (एफ.आई.आर. 153 तारीख़ 20 अगस्त, 2020 आई.पी.सी. की धारा 460/459 /458) के साथ सम्बन्धित प्रस्थितियों और भौतिक सबूतों को एकत्रित किया और पड़ताल के दौरान आई.पी.सी. की धारा 302, 307, 148, 149 भी जोड़ी गई। जांच में 100 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों को शामिल किया गया।
15 सितम्बर को एस.आई.टी. को सूचना प्राप्त हुई कि तीन संदिग्धों, जिनको घटना के बाद सुबह के समय पर डिफेंस रोड़ पर देखा गया था, पठानकोट रेलवे स्टेशन के नज़दीक झुग्गियों में रह रहे थे। पुलिस ने छापा मारा और इन तीनों को काबू कर लिया।
डी.जी.पी. के मुताबिक इनकी पहचान सावन ऊर्फ मैचिंग, मोहब्बत और शाहरुख ख़ान के तौर पर हुई है, जो मौजूदा समय में राजस्थान के जि़ला चिवाड़ा और पिलानी झुग्गियों के निवासी हैं। इनसे सोने की अंगूठी, महिला की एक अंगूठी, महिला की एक सोने की चेन और 1530 रुपए बरामद किए गए।
प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ कि यह गैंग बाकियों के साथ मिलकर अपनी सरगर्मियाँ चला रहा था और उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के अन्य हिस्सों में पहले भी ऐसे कई अपराधों को अंजाम दे चुका है। यह गैंग नहरों, रेलवे लाईनज़, हाई वोल्टेज तारों आदि कुदरती निशानों के बाद 2-3 के समूहों में अपराध वाले स्थानों की तरफ बढ़ते थे।
सावन, जो उत्तर प्रदेश का मूल निवासी है, ने एस.आई.टी. को बताया कि 12 अगस्त को वह चिरावा और पिलानी से एक ऑटो (पी.बी. 02 जी. 9025) जिसका मालिक नौसाऊ है, ग्रुप के तौर पर चले थे। नौसाऊ भी चिरावा की झुग्गियों में रह रहा था। नौसाऊ तीन अन्य समेत राशिद, रेहान, जबराना, वापहला, तवज्जल बीबी और एक अज्ञात व्यक्ति के साथ शामिल था।
यह व्यक्ति जगराओं (लुधियाना) पहुँचे, जहाँ तीन अन्य रींड़ा, गोलू और साजन भी साथ मिल गए। उन्होंने हार्डवेयर स्टोर से एक आरी, दो प्लायर और एक स्कर्यू ड्राइवर और लुधियाना में कपड़े की दुकान से कच्छे एवं बनयन खरीदीं। वह 14 अगस्त की रात को जगराओं में लूट करने के बाद पठानकोट की तरफ चले गए।
डी.जी.पी. ने बताया कि पठानकोट के एस.एस.पी. गुलनीत खुराना के मुताबिक पठानकोट में संजू नाम का व्यक्ति जो इलाके से अच्छी तरह वाकिफ़ था, भी इनके साथ मिल गया। इस गैंग ने इलाके की रैकी भी की।
19 अगस्त की रात को 7-8 बजे के दरमियान निश्चित कार्य विधि के मुताबिक वह 2-3 व्यक्तियों के ग्रुपों में चले और खेत में तय जगह पर पहुँचे जहाँ राशिद, नौसाऊ और संजू उर्फ छज्जू लकड़ी की लाठियां लेने के लिए गए जहाँ उन्होंने नीलगिरी का वृक्ष काटा।
रैकी के दौरान उन्होंने शटरिंग की दुकान की पहले ही पहचान की हुई थी, जहाँ बाँस की सीढिय़ों को चेन के साथ बांधा हुआ था। पहले दो घर जहाँ उन्होंने सीढिय़ाँ रखी थीं, में एक गोदाम और एक खाली घर था, जबकि तीसरा घर अशोक कुमार का था। दोषियों में से पाँच व्यक्ति छत वाले के पास से सीढिय़ाँ इस्तेमाल करके घर में दाखि़ल हुए, जहाँ उन्होंने तीन व्यक्तियों को चटाई पर पड़े देखा। घर में जाने से पहले उन्होंने इन तीनों के सिर में चोट मारी, जहाँ उन्होंने नकदी और सोने के गहने लेकर भागने से पहले दो अन्य व्यक्तियों पर हमला किया।
इसके बाद दोषियों ने नहर पर पहुँचने के लिए खुले मैदान के द्वारा बिजली की हाई टेंशन तारों को पार किया, जहाँ वह रेलवे स्टेशन पर पहुँचने के लिए दो-दो और तीन-तीन के समूहों में बाँटे गए। नकद और गहने आपस में बाँट लेने के बाद वह बिखर गए।
फऱार हुए 11 व्यक्तियों जिनमें से एक व्यक्ति की पहचान हो चुकी है, को काबू करने और इस गैंग की सम्मिलन वाली अन्य डकैतियों को सुलझाने के लिए जांच अभी भी जारी है।
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यह कदम राज्य में अशांति फैलाने और पाकिस्तान के हाथों में खेलने के बराबर-मुख्यमंत्री ने दी चितावनी
अकालियों के इस मुद्दे संबंधी यू-टर्न को ड्रामेबाज़ी बताते हुए सवाल किया कि पहले उन अध्यादेशों का विरोध क्यों नहीं किया

चंडीगढ़, 16 सितम्बर:

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बुधवार को एक कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनौर के साथ मुलाकात करके उनको एक मैमोरंडम सौंपा और केंद्र सरकार द्वारा संसद में कृषि बिलों को लागू न करने सम्बन्धी ज़ोर डालने के लिए उनका दख़ल माँगा। मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि कृषि अध्यादेशों को अमली रूप में लागू किए जाने से इस सरहदी राज्य में अशांति और गुस्से की लहर दौड़ जाएगी। क्योंकि राज्य पहले ही पाकिस्तान द्वारा गड़बड़ी पैदा करने की भद्दी कोशिशों के साथ जूझ रहा है।


पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ और प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों की हाजिऱी में मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को बताया कि पार्टी यह महसूस करती है कि मौजूदा खऱीद प्रणाली के साथ किसी भी किस्म की छेड़छाड़ और वह भी देश व्यापक संकट के इस समय में राज्य के किसानों में फैली सामाजिक तौर पर बेचैनी और गहरी हो सकती है। मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि, ‘‘इस क्षेत्र, जो कि पहले ही अंतरराष्ट्रीय सरहद की तरफ से पेश गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, की शान्ति और विकास के लिए यह कदम उठाया जाना घातक सिद्ध हो सकता है।’’

राज्य में अमन और स्थिरता के माहौल को नशों और अन्य भारत विरोधी कार्यवाहियों से विकास को पटरी से उतारने की पाकिस्तान द्वारा की जाने वाली कोशिशों संबंधी मुख्यमंत्री ने राज भवन से बाहर पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि किसान विरोधी इन बिलों के साथ लोगों के गुस्से में वृद्धि होगी। उन्होंने पूछा कि, ‘‘हम पाकिस्तान के हाथों में क्यों खेल रहे हैं।’’

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने चेतावनी भरे लहज़े में कहा कि यह बिल, जिनमें से एक को बीते दिनों लोक सभा में पास उठाया जा चुका है, राष्ट्रीय हितों के खि़लाफ़ हैं और ख़ासकर पंजाब के लिए घातक हैं, जहाँ कि बड़ी संख्या में किसानों के पास पाँच एकड़ से कम ज़मीन है और जिनको इसका सबसे अधिक नुकसान पहुँचेगा। उन्होंने आगे कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि केंद्र सरकार बाकी रहते दो बिलों को संसद में पास करवाने से गुरेज़ करेगी। उन्होंने आगे बताया कि केंद्र सरकार ने इन अध्यादेशों को पास करवाने की कोशिश में किसानों के हितों का ध्यान नहीं रखा, बल्कि इसके उलट कॉर्पोरेट घरानों का पक्ष लिया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे बाबत तीन बार प्रधानमंत्री को लिख चुके हैं, परन्तु अभी तक कोई जवाब नहीं मिला और बाकी रहते दो बिलों को कानून की सूरत देने से पंजाब बर्बाद हो जाएगा। क्योंकि यदि एम.एस.पी. प्रणाली ख़त्म की जाती है, इस दिशा में केंद्र सरकार बढ़ती हुई नजऱ आ रही है, तो पंजाब और पूरे देश का कृषि क्षेत्र तबाह हो जाएगा।

इस मुद्दे संबंधी अकालियों और सुखबीर सिंह बादल द्वारा ड्रामेबाजिय़ां और यू-टर्न लेने संबंधी मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्बन्धी बुलाई गई सर्वदलीय मीटिंग में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी को छोडक़र सबने राज्य सरकार का साथ दिया। उन्होंने आगे बताया कि, ‘‘हमने प्रांतीय विधान सभा में एक प्रस्ताव पास किया और सभी राजनैतिक पक्षों और किसान जत्थेबंदियों के साथ बातचीत की और सभी ने ही राज्य के हक की बात की थी, सिवाए शिरोमणी अकाली दल के, जो कि अब इन अध्यादेशों की खि़लाफ़त का नाटक कर रहे हैं।’’

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि, ‘‘क्या हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय कैबिनेट की मैंबर नहीं? उन्होंने वहाँ अपना विरोध क्यों नहीं प्रकट किया और क्यों वह बाहर भी इस मुद्दे संबंधी कुछ नहीं बोल रहे? अकाली दल ने विधान सभा में क्या किया?’’ उन्होंने बताया कि अकालियों का यू-टर्न ड्रामेबाज़ी है और मुँह रखने की कार्यवाही से सिवाए कुछ भी नहीं है।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने यह भी खुलासा किया कि कांग्रेस और उनकी सरकार ने हमेशा ही इन अध्यादेशों का घोर विरोध किया है और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री द्वारा संसद में बिल्कुल गुमराह करने वाला बयान दिया गया कि पंजाब ने इस मुद्दे को पंजाब की सहमति हासिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि असल बात तो यह है कि भारत सरकार द्वारा कृषि संशोधनों संबंधी कायम की गई उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी में से पंजाब को बाहर रखा गया था और उनकी सरकार द्वारा रोष प्रकट करने पर ही राज्य को कमेटी में शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि एक मीटिंग में मनप्रीत सिंह बादल शामिल हुए थे, जब कि दूसरी मीटिंग अधिकारियों के स्तर की थी, जिसमें हमारे अफसरों को यह स्पष्ट कर दिया गया था कि उनकी कोई राय नहीं माँगी जा रही, बल्कि उनको इन प्रस्तावित सुधारों संबंधी अवगत ही करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन अध्यादेशों संबंधी कभी भी जि़क्र नहीं किया गया।

बीते दिन लोक सभा में एक बिल पास होने को संसद के इतिहास का काला दिन बताते हुए सुनील जाखड़ ने कहा कि किसान यूनियनों के दबाव अधीन अकाली दल केंद्र सरकार से इस्तीफे का नाटक रचने की हद तक भी जा सकता है परन्तु इसके साथ पार्टी का एक और झूठ नंगा हो जाएगा। उन्होंने देश ख़ासकर पंजाब के किसानों को सजदा किया, जिन्होंने अकालियों को इस मुद्दे पर अपना फ़ैसला पलटने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने विशेष तौर पर केंद्रीय मंत्री राओसाहिब दानवे के दावे को रद्द करते हुए कहा कि अध्यादेशों के मामलो में पंजाब के साथ कभी भी सलाह नहीं की गई।

राज्यपाल को आज मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कैप्टन अमरिन्दर सिंह और सुनील जाखड़ के अलावा कैबिनेट मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, सुखजिन्दर सिंह रंधावा और भारत भूषण आशु, विधायक राणा गुरजीत सिंह, कुलजीत सिंह नागरा और डॉ. राज कुमार वेरका और प्रदेश कांग्रेस सचिव कैप्टन सन्दीप संधू भी शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को विनती की, ‘‘केंद्र सरकार के पास सिफ़ारिश की जाए कि वह अध्यादेशों को आगे कानून बनाने के लिए बिलों को लोक सभा में पेश न करे।’’ उन्होंने राज्यपाल से अपील की कि वह इस मामले को केंद्र सरकार के पास तत्काल तौर पर ध्यान देने और कार्यवाही के लिए कहें। उन्होंने कहा कि कृषि मंडीकरण व्यवस्था में नए बदलावों से किसानों में यह अंदेशे पैदा हो जाएंगे कि सरकार उनकी तरफ से पैदा की जाने वाली फसलों की गारंटीशुदा खरीद से हाथ पीछे खींचने की योजना बना रही है।

माँग पत्र में केंद्र सरकार को बिलों द्वारा पेश किए गए कदमों की समीक्षा और पुन: विचार करने की अपील की गई, ‘‘क्योंकि इनके द्वारा किए गए वायदे पूरे होने की संभावना नहीं है। हमारे संविधान के अनुसार कृषि मंडीकरण का विषय राज्यों पर छोड़ देना चाहिए।’’

बिल, भारत सरकार द्वारा 5 जून 2020 को जारी किए गए तीन अध्यादेशों से सम्बन्धित हैं, जो ए.पी.एम.सी. एक्ट के अंतर्गत कृषि मंडीकरण की सीमाओं से बाहर जाकर कृषि उत्पाद बेचने का कारोबार करने, ज़रूरी वस्तुएँ एक्ट के अंतर्गत बंदिशों को नरम करने और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की सुविधा देने की आज्ञा देते हैं।

माँग पत्र में बताया गया कि पंजाब में कृषि उत्पाद मंडीकरण व्यवस्था पिछले 60 सालों से बेहतर ढंग से चल रहा है। ‘‘यह परख की कसौटी पर खरा उतरा है। इससे जहाँ अन्न सुरक्षा यकीनी बनी है, वहीं लाखों किसानों और कामगारों की रोज़ी-रोटी का भी साधन बना है।’’ आगे कहा गया कि पंजाब में आला दर्जे का ढांचा विकसित किया गया है, जिसके अंतर्गत उत्पाद के खुले मंडीकरण और भंडारण के अलावा फ़सल को खेत से मंडी तक लाने और आगे मंडी से गोदामों तक पहुंचाने की सुचारू व्यवस्था है।

प्रतिनिधिमंडल द्वारा राज्यपाल को सौंपे गए माँग पत्र के अनुसार पंजाब विधान सभा ने भी 28 अगस्त 2020 को एक संकल्प पास करके केंद्र सरकार को इन फ़ैसलों पर फिर गौर करने और किसानों के लिए न्युनतम समर्थन मूल्य का कानूनी अधिकार के लिए एक और अध्यादेश लाने की अपील की थी।

केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए कृषि संबंधी अध्यादेशों के विरोध में 15 से 20 सितंबर तक किसानों ने 6 दिन तक पटियाला और गांव बादल में पक्का मोर्चा जमा दिया है। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के नेताओं ने बताया कि गांव बादल तक पहुंचने के लिए उन्हें काफी जद्दोजहद करनी पड़ी, लेकिन रास्ते में लगाई गई पुलिस की रोक के बावजूद वह केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के घर के समक्ष पहुंच गए हैं तथा मोर्चा लगा दिया है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि संबंधी जारी अध्यादेश के विरोध में विभिन्न किसान संगठनों का संघर्ष चल रहा है।


केंद्र सरकार द्वारा जारी शादी समागम में 100 लोगों की मंजूरी पंजाब में भी लागू करने की मांग को लेकर टेंट हाउस, कैटरिंग फोटोग्राफर फ्लावर डेकोरेशन डीजे साउंड सिस्टम वालों ने किया शहर में प्रदर्शन


केंद्र सरकार द्वारा जारी नियम पंजाब में लागू करवाने की मांग को लेकर मंगलवार को करेंगे श्री मुक्तसर साहिब शहर में रैली


भारत में COVID19 ने पिछले 24 घंटों में 94,372 नए मामलों और 1,114 मौतों के साथ 47 लाख का आंकड़ा पार किया है।
भारत कुल मामले 9,573,175, सक्रिय मामलों सहित 47,54,357 पर खड़ा है, अब तक 37,02,596 मरीज ठीक हुए और 78,586 मौतें हुई हैं।

कोविड पर घटिया राजनीति खेलने के लिए ‘आप’ की कड़ी आलोचना

चंडीगढ़, 11 सितम्बर:

राष्ट्रीय राजधानी में कोविड की भयानक स्थिति का जि़क्र करते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने महामारी पर घटिया राजनीति खेलने के लिए आम आदम पार्टी की कड़ी आलोचना की है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कोविड की स्थिति के साथ निपटने में पंजाब सरकार के विरुद्ध नकारात्मक प्रचार करने के लिए ‘आप’ की मुहिम को ‘ग़ैर-जिम्मेदाराना’ करार दिया है।
राज्य में कोविड के संकट पर विचार करने के लिए कांग्रेसी विधायकों के साथ चौथे दौर की वर्चुअल मीटिंग में मुख्य मंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया की तरह भारत भी जंग जैसी स्थिति का सामना कर रहा है और इसका सामना एकजुटता के साथ किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस संकट के दौरान भी घटिया राजनीति खेलने पर तत्पर है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सभी राज्यों यहाँ तक कि जहां उनकी सरकार भी नहीं है, में महामारी के साथ निपटने के लिए सरकारों की मदद कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसी भी राज्य चाहे वह दिल्ली, हिमाचल प्रदेश या हरियाणा हो, की मदद करने के लिए तैयार हैं। इस संकट से निपटने का यही एक रास्ता है। उन्होंने कहा, ‘यदि कल को दिल्ली को मेरी मदद की ज़रूरत पड़ी तो मैं बिल्कुल इस मदद की पेशकश करूँगा’।
उन्होंने बताया कि आप द्वारा पेश की जा रही तस्वीर के उलट सच्चाई यह है कि पंजाब की अपेक्षा दिल्ली की हालत कहीं अधिक खऱाब है। पंजाब में 18,000 सक्रिय मामले हैं जबकि आबादी 2.90 करोड़ है जबकि 1.80 करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में 25,000 से भी अधिक एक्टिव मामले हैं। हरियाणा की आबादी भी पंजाब की अपेक्षा कम है परन्तु मामले पंजाब के बराबर ही हैं।
गरीब वर्ग के लोगों को जांच करवाने के लिए सामने आने हेतु प्रोत्साहन देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे लोगों को खाने के मुफ़्त पैकेट बाँटने शुरू कर दिए हैं जो कि एकांतवास में हैं और जिनके पास इस स्थिति में रोज़ी-रोटी का कोई साधन नहीं है। उन्होंने विधायकों को जि़ला प्रशासन के साथ तालमेल बना कर काम करने के लिए कहा जिससे यह यकीनी बनाया जा सके कि खाने के पैकेट जरूरतमंद लोगों तक पहुँच रहे हैं और गरीब लोग एकांतवास के दौरान रोज़ी-रोटी से वंचित होने के डर के कारण जांच के लिए सामने आने से गुरेज़ न करें।
ज़्यादातर विधायकों ने इस बात पर सहमति अभिव्यक्त की कि विरोधी पार्टियाँ, जोकि राजनैतिक गतिविधियों के लिए नियम कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं, की तरफ से किया जा रहा नकारात्मक प्रचार लोगों को जल्द जांच के लिए सामने आने के लिए प्रेरित करने के रास्ते में रुकावट बन रहा है और सभी की कोशिशों के बावजूद सामाजिक दूरी के नियम की पालना भी नहीं की जा रही।
विधायकों ने यह भी शिकायत की कि निजी अस्पतालों की तरफ से कोविड संकट के दौरान मुनाफ़ाख़ोरी के चक्कर में मरीज़ों से काफ़ी अधिक कीमतें वसूली जा रही हैं बावजूद इसके कि राज्य सरकार ने कीमतें तय की हुई हैं।
आज की वर्चुअल मीटिंग में हिस्सा लेने वाले विधायकों में बस्सी पठाणा से गुरप्रीत सिंह जी.पी., फतेहगढ़ साहिब से कुलजीत सिंह नागरा, फिऱोज़पुर शहरी से परमिन्दर सिंह पिंकी, फाजिल्का से दविन्दर सिंह घुबाया, बल्लूआना से नत्थू राम, मोगा से हरजोत कमल, जलालाबाद से रमिन्दर आँवला, जालंधर कैंट से प्रगट सिंह और फरीदकोट से कुशलदीप सिंह ढिल्लों शामिल थे। 

चंडीगढ़, 11 सितम्बर:


पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कोविड के बढ़ रहे मामलों के मद्देनजऱ राज्य के सभी नागरिकों को हर जिले में प्रवानित विक्रेेताओं के द्वारा 514 रुपए की वाजिब कीमत पर ऑक्सीमीटर मुहैया करवाने का ऐलान किया है।
अपने फेसबुक प्रोग्राम ‘कैप्टन को सवाल’ की 17वीं कड़ी के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्बन्ध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक हफ़्ते में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये जाएंगे। उन्होंने बताया कि विभाग की तरफ से स्वास्थ्य कामगारों के लिए यह ऑक्सीमीटिर 514 रुपए की कीमत पर खरीदा जा रहा है और इन ऑक्सीमीटरें को अब ‘कोई लाभ नहीं, कोई घाटा नहीं’ के आधार पर आम लोगों के लिए भी अधिकारित विक्रेताओं के द्वारा मुहैया करवा दिया जायेगा।
रायकोट के एक निवासी ने सुझाव दिया था कि सरकार की तरफ से हर घर में सस्ती कीमत पर ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर दिए जाने चाहिएं जिसके जवाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बताया कि उनकी सरकार की तरफ से 50,000 कोविड केयर किटें मुफ़्त बाँटी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन किटों में ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर के अइलावा अन्य ज़रूरी वस्तुएँ भी शामिल हैं।
गुरदासपुर के एक निवासी के डर को दूर करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यदि वह कोरोना पॉजिटिव आ जाते हैं तो उनको अस्पताल में नहीं रखा जायेगा परन्तु घरेलू एकांतवास में रहने और अपने स्वास्थ्य पर निरंतर नजऱ रखते हुये देखभाल करने के लिए कहा जायेगा।
एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि घरेलू एकांतवास के लिए ज़रूरत पडऩे पर दवाएँ दीं जाती हैं। घरेलू एकांतवास की निगरानी करने वाली टीमें पॉजिटिव मरीज़ों के घर 10 दिनों में तीन बार दौरा करके स्वास्थ्य के बारे जांच करती हैं और मरीज़ की देखभाल करने वाले को अपेक्षित सलाह भी देती हैं। इन टीमों से तरफ से सलाह के मुताबिक थर्मामीटर, पल्स ऑक्सीमीटर, विटामिन -सी और जि़ंक की गोलियों की उपलब्धता भी पूछी जाती है। टीम की तरफ से मरीज़ के देखभाल करने वाले को फ़ोन करके भी पूछा जाता है।
राज्य में मौत की बढ़ती दर, जिसका कारण अस्पतालों में इलाज के लिए देरी से पहुँचना है, की तरफ इशारा करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने लोगों को कहा कि लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअन्दाज न करके इस बीमारी का मुँह मोडऩे में उनकी और उनकी सरकार की मदद की जाये और समय पर अपनी जांच और अस्पतालों में भर्ती हुआ जाये क्योंकि ज़्यादातर मौतें स्तर -3 स्तर पर हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अस्पतालों की हालत में सुधार हुआ है और उनकी सरकार के द्वारा सहूलतों में विस्तार करने पर काफ़ी रकम ख़र्च की गई है और उनकी तरफ से अपने मंत्रियों को उनकी निगरानी अधीन जि़लों में स्थिति का ज़मीनी स्तर पर जायज़ा लेने हेतु दौरे करने के लिए भी कहा गया है।
माईक्रोफ़ोन के द्वारा बोलते समय समागमों और भीड़ों के दौरान क्या मास्क हटाए जा सकते हैं, संबंधी पूछे गए एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार के सामाजिक जलसा में बिल्कुल ही शामिल न होने की सलाह दी गई है परन्तु यदि बहुत ही ज़रूरी हो तो हर समय समूह प्रोटोकालों का ध्यान ज़रूर रखना चाहिए।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि समूचे तौर पर देखा जाये तो देश और विश्व में स्थिति अच्छी नहीं है और पंजाब भी इससे अछूता नहीं है परन्तु हरेक पंजाबी की जि़ंदगी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
खडूर साहिब के एक निवासी की तरफ से दिए गए सुझाव कि पंजाब सरकार की तरफ से आंध्रा प्रदेश की तजऱ् पर प्लाज्मा दान करने वालों को वित्तीय लाभ देना चाहिए, के बारे मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पंजाबी बहुत ही खुल्ले दिल वाले हैं और कोई पंजाबी प्लाज्मा और खूनदान करने के एवज मेें के तौर पर पैसे क्यों लेगा, यह हमारे सभ्याचार का हिस्सा ही नहीं है।
एन.एच.एम. वर्कर, जोकि बीते 10 सालों से नामात्र से वेतन पर गुज़ारा कर रहे हैं, बावजूद इसके कि वह कोविड की जंग में अग्रणी योद्धे हैं, की एक विनती के बारे मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पहले ही राज्य में ठेके पर काम कर रहे मुलाजिमों को रेगुलर करने के मसले पर विचार करने के लिए एक कैबिनेट सब कमेटी गठित की हुई है। फरीदकोट के एक निवासी को ऐसा ही यकीन दिलाते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार स्वास्थ्य वर्करों ख़ास कर जो कोविड की ड्यूटी निभा रहे हैं, की देखभाल के लिए वचनबद्ध है।
बढ़े हुए बिजली बिलों के बारे कई शिकायतों की तरफ इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महामारी के कारण मीटर रीडिंग नहीं थी की जा रही परन्तु अब उन्होंने इसके हुक्म दिए हैं जिससे लोगों को असली उपभोग के हिसाब के साथ बिल आ सकें। यदि बढ़ी हुई रकम पहले ही अदा की जा चुकी है तो इसको एकसार कर लिया जायेगा।

चंडीगढ़, 11 सितम्बर:

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य में बढ़ रही मौतों पर गंभीर चिंता ज़ाहिर करते हुए नौजवानों से अपील की कि सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी पोस्ट डालने या आगे भेजने (फॉरवर्ड करने) से पहले 10 बार सोचें, क्योंकि किसी भी तरह का ग़ैर-जि़म्मेदाराना कदम उनके भविष्य पर प्रभाव डाल सकता है।
फेसबुक प्रोग्राम के लाइव सैशन ‘कैप्टन को सवाल’ पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आप जो कुछ भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हो, उसकी आपकी जि़म्मेदारी है...आप लोगों को गुमराह नहीं कर सकते।’’ मुख्यमंत्री ने इस बात का भी जि़क्र किया कि एक बार केस दर्ज होने पर उनका समूचा भविष्य बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। उन्होंने नौजवानों को जि़म्मेदारी के साथ काम करने की अपील की। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि अब तक 121 सोशल मीडिया अकाऊंट/लिंक ब्लॉक किए जा चुके हैं और 292 अन्य ऐसे अकाऊंट/लिंक की पहचान पंजाब पुलिस द्वारा की जा चुकी है, जो अंग निकालने और कोविड की टेस्टिंग संबंधी झूठा प्रचार करने वालों में शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी को भी ऐसे बेहूदा और निराधार प्रचार के द्वारा पंजाब के शांतमई माहौल को भंग करने की हरगिज़ इजाज़त नहीं देंगे।’’
कुछ शरारती तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर मुहिमें चलाने और यहाँ तक कि विरोधी पक्ष के विधायकों द्वारा लोगों को मास्क न पहनने के लिए बोले जाने का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को झूठी खबरों और पोस्टों के द्वारा गुमराह करने की कोशिशों को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जाएगा और न ही बर्दाश्त किया जाएगा।
अमृतसर के एक निवासी द्वारा सरकार के कोविड मरीज़ों की पहचान ज़ाहिर न करने के फ़ैसले के बावजूद मीडिया द्वारा लगातार कोविड मरीज़ों के नाम सामने लाए जाने संबंधी प्रकट किए गए अंदेशे के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा कोविड मरीज़ों की पहचान गुप्त रखने सम्बन्धी कड़ी हिदायतें जारी की हुई हैं और इनकी पालना यकीनी बनाई जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि कोविड के किसी भी मरीज़ चाहे वह उपचाराधीन हो या ठीक हो चुका हो, के साथ किसी किस्म का कोई भेदभाव करने से गुरेज़ किया जाए। यह बीमारी अन्य बीमारियों की तरह ही एक बीमारी है और सामाजिक कलंक को इससे जोडऩा पूर्ण तौर पर ग़ैर-वाजिब है।
पंजाब में कोविड से मुक्ति पर इस महामारी संबंधी फैली अफ़वाहों के कारण प्रभाव पडऩे की मीडिया रिपोर्टों सम्बन्धी मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड जांच में इस कारण कमी आई है क्योंकि सोशल मीडिया पर गुमराह करने वाला प्रचार किया जा रहा है, जिस कारण लोग समय पर इलाज नहीं करवा रहे।

पंजाबी गायक कुलविंदर बिल्ला ने कोरोना को मात देने के बाद प्लाजमा दान किया, उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट करके ये जानकारी दी उन्होंने लिखा के में ठीक होने के बाद आज प्लाजमा देने आया हूं और में सभी ठीक हुए लोगों से केहना चाहता हूं के वो भी प्लाजमा दे के जादा से ज्यादा लोगों की जान बचाए।

 पंजाब सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश 30.09.2020 तक रहेंगे लागू, सभी 167 म्युंसिपल शहरों में सिफऱ् रविवार को रहेगा कर्फ्यू 
शहरों की म्युंसिपल हदों के अंदर रात 9:30 बजे से प्रात:काल 5 बजे तक सभी ग़ैर-ज़रूरी कामों के लिए यातायात पर रहेगी पाबंदी

चंडीगढ़, 9 सितम्बर:

कोविड -19 महामारी के दौरान शहरी क्षेत्रों में और ज्यादा राहत देने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने पंजाब के मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों पर ऐलान किया है कि 30.09.2020 तक राज्य के सभी 167 म्युंसिपल कस्बों में सिफऱ् रविवार वाले दिन ही पूरा कर्फ्यू  रहेगा और शनिवार को दिन में कोई कर्फ्यू  नहीं होगा।
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुये आज यहाँ पंजाब सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कोविड -19 स्थिति का जायज़ा लिया है और शनिवार को दिन के कर्फ्यू  में ढील के अलावा शहरी क्षेत्रों में कुछ अन्य पाबंदियों में ढील देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हफ़्ते के दौरान पंजाब के सभी शहरों की म्युंसिपल हदों के अंदर रात 9:30 बजे से प्रात:काल 5 बजे तक सभी ग़ैर-ज़रूरी कामों के लिए व्यक्तियों के यातायात पर पाबंदी रहेगी।
हालाँकि, ज़रूरी गतिविधियों और सेवाओं जैसे कि राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर व्यक्तियों और वस्तुओं के यातायात, अंतर-राज्ज़ीय और राज्य के अंदर व्यक्तियों के यातायात, माल उतारने और बसें, रेल गाड़ीयों और हवाई जहाजों में से उतरने के बाद हिदायतों के मुताबिक व्यक्तियों को अपनी मंजिल पर जाने की आज्ञा होगी।
उन्होंने आगे बताया कि स्वास्थ्य, कृषि और सम्बन्धित गतिविधियों, डेयरी और मछली पालन की गतिविधियों, बैंकों, एटीऐमज़, स्टॉक मार्किटों, बीमा कंपनियों, ऑन-लाईन टीचिंग, सार्वजनिक सहूलतें, सार्वजनिक परिवहन, मल्टीपल -शिफ्टों में उद्योग, निर्माण उद्योग, निजी और सरकारी दफ़्तरों आदि की भी मंज़ूरी होगी।
उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा स्वास्थ्य संभाल संस्थाओं जैसे कि अस्पताल, लैबों, डायगनौस्टिक सैंटर और कैमिस्ट दुकानें हफ़्ते के सभी दिनों के दौरान 24 घंटे खुली रहेंगी। इसके अलावा हर तरह की परीक्षाएं, यूनिवर्सिटियां, बोर्डों, लोक सेवा कमीशनों और अन्य संस्थायों के द्वारा करवाई जाती दाखि़ला परीक्षाओं के सम्बन्ध में विद्यार्थियों और व्यक्तियों के यातायात की भी आज्ञा होगी।
हफ़्ते के अंतिम वाले दिनों/रात की पाबंदियों का विवरण देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि ज़रूरी वस्तुओं के कारोबार में शामिल दुकानों / मालों को छोड़ कर बाकी दुकान /मालों को सोमवार से शनिवार तक रात 9 बजे तक खुले रहने की इजाज़त होगी परन्तु रविवार को सभी शहरों में यह बंद रहेंगे। ज़रूरी वस्तुओं के कारोबार में शामिल दुकानें /माल हफ़्ते के अंतिम वाले दिनों के दौरान भी रात के 9 बजे तक खुले रहेंगे।
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही धार्मिक स्थानों को भी रात के 9 बजे तक सभी दिनों के दौरान खुले रहने की इजाज़त दी गई है, जैसे कि रैस्टोरैंट (माल, होटलों के बीच वाले सहित) और शराब के ठेके के मामलों में दी गई है। दिन / समय की पाबंदी होटल पर लागू नहीं होती।
गौरतलब है कि वाहनों में यात्रियों की संख्या पर मौजूदा पाबंदियां भी लागू रहेंगी जिसमें 4 पहिया वाहन में ड्राईवर समेत 3 व्यक्तियों और सभी बसों और सार्वजनिक परिवहन वाहनों को बैठने की सिफऱ् आधे (50प्रतिशत)सामथ्र्य के साथ चलने की आज्ञा दी गई है।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि सरकारी और प्राईवेट दफ़्तर महीने के अंत तक 50 प्रतिशत स्टाफ के साथ काम करेंगे, भाव किसी भी दिन 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को काम करने की इजाज़त नहीं दी जाऐगी। दफ़्तरों के प्रमुख सरकारी दफ्तरों में सार्वजनिक आमद को सीमित रखेंगे और ऑन-लाईन पंजाब शिकायत निवारण प्रणाली (पीजीआरएस) और अन्य ऑन-लाईन साधनों के प्रयोग को उत्साहित करेंगे जिससे दफ्तरों में व्यक्तिगत संपर्क को कम से कम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सीआरपीसी की धारा 144 के अंतर्गत सभी सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक भीड़ों, विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाई जायेगी, जबकि विवाह और अंतिम संस्कार से जुड़े भीड़ों में क्रमवार सिफऱ् 30 व्यक्तियों और 20 व्यक्तियों को शामिल होने की आज्ञा होगी। उन्होंने आगे कहा कि इन हुक्मों का उल्लंघन करने पर सी.आर.पी.सी की धारा 144 के अंतर्गत प्रबंधकों और मुख्य भागीदारों के खि़लाफ़ सख़्त कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने दोहराया कि उपरोक्त पाबंदियां राज्य के सिफऱ् शहरी क्षेत्रों में लागू होंगी।
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bttnews

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