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जसवीर सिंह गढ़ी के पक्ष में उमड़ा अकाली वर्करों का जनसैलाब, मीटिंग ने धारण किया रैली का रूप

  - सरवण सिंह कुलार, जरनैल सिंह वाहद, रणजीत सिंह खुराना, मास्टर हरभजन सिंह बलालों, राजिंदर सिंह चंदी सहित अन्य नेता रहे मौजूद - जालंधर में ह...

 - सरवण सिंह कुलार, जरनैल सिंह वाहद, रणजीत सिंह खुराना, मास्टर हरभजन सिंह बलालों, राजिंदर सिंह चंदी सहित अन्य नेता रहे मौजूद

- जालंधर में होने वाली भूल सुधार रैली में वर्करों को बढ़-चढ़कर पहुंचने की अपील

जसवीर सिंह गढ़ी के पक्ष में उमड़ा अकाली वर्करों का जनसैलाब, मीटिंग ने धारण किया रैली का रूप

फगवाड़ा 8 अक्टूबरः
बहुजन समाज पार्टी और शिरोमणि अकाली दल गठबंधन द्वारा फगवाड़ा से घोषित किए गए हल्का इंचार्ज और बसपा के प्रदेश अध्यक्ष सरदार जसवीर सिंह गढ़ी के पक्ष में शिरोमणि अकाली दल की ओर से एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में अकाली दल के वर्करों के जोश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बैठक ने ही रैली का रूप धारण कर लिया और वर्करों के जबरदस्त जनसैलाब ने पार्टी नेताओं में जोश और उत्साह पहले से भी दोगुना कर दिया। इस दौरान हाजरीन को संबोधित करते हुए बसपा प्रदेश अध्यक्ष सरदार जसवीर सिंह गढ़ी ने 9 अक्टूबर, दिन शनिवार को जालंधर की डीएवी यूनिवर्सिटी के नजदीक होने वाली भूल सुधार रैली में सभी वर्करों को पूरे जोशो खरोश के साथ पहुंचने का निमंत्रण देते हुए कहा कि साहिब श्री कांशीराम जी ने साल 2001 में पंजाब में पहली बार भूल सुधार रैली की थी जिसमें साहिब श्री कांशी राम जी ने कहा था कि समय-समय पर अनेकों महापुरुष आए जिन्होंने निमाणे, निआसरे बहुजन समाज को सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने के लिए प्रेरित किया और इसी तहत श्री गुरु रविदास जी ने ऐसा चाहूं राज में और बेगमपुरा का संकल्प लिया, श्री गुरु नानक देव जी ने शेरों, बघिआड़ों आदि जैसे हुक्मरानों को बदलकर लायक हुक्मरान पैदा करने के लिए लामबंदी की, छेवीं पातशाही ने पीरी के साथ मीरी की कृपाण डालकर सत्ता अच्छे हाथों में लेने की कोशिश की, दशमेश पिता ने इन गरीब सिखन को दूं पातशाही के संकल्प के तहत 14 जंगे लड़ीं और इसी क्रम में महात्मा ज्योतिबा फुले और छत्रपति शाहूजी महाराज के बाद बाबा साहेब डॉक्टर अंबेडकर ने सत्ता सभी मुश्किलों के हल की चाबी है, का संदेश दिया और देश की पार्लियामेंट और प्रदेशों के विधानसभाओं पर कब्जा करने का बहुजन समाज को संदेश दिया। पंजाब में भी दुआबा की धरती पर बाबू मंगूराम मंगोवालिया जी ने आदिधर्म आंदोलन के माध्यम से सत्ता के हिस्सेदार बनने की प्रेरणा दी।
जसवीर सिंह गढ़ी के पक्ष में उमड़ा अकाली वर्करों का जनसैलाब, मीटिंग ने धारण किया रैली का रूप

उन्होंने कहा कि साहब कांशीराम जी ने साल 2001 में कि भूल सुधार रैलीमें यह बात कही थी कि समय-समय पर आए अनेकों महापुरुषों द्वारा सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने की प्रेरणा दिए जाने के बावजूद हम लोग सत्ता की चाबी अपने हाथ में नहीं ले सके और हमारे महापुरुषों के जीवित रहते हुए सत्ता ना ले पाने की हमसे जो भूल हुई है उसे सुधारने का सुनहरी अवसर अब 2022 की विधानसभा चुनावों में हमें मिल रहा है। उन्होंने कहा कि साहिब श्री कांशीराम जी के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए और भूल को सुधारना चाहिए। इस दौरान जत्थेदार सरवण सिंह कुलार और जत्थेदार जरनैल सिंह वाहद ने अपने अपने संबोधन में कहा कि वर्करों में अकाली-बसपा गठबंधन को लेकर भरपूर जोश और उत्साह है और उसी का ही परिणाम है कि छोटी सी बुलाई गई बैठक ने रैली का रूप ले लिया है और उम्मीद से ज्यादा संख्या में पहुंचे वर्करों को देखकर उनका मोराल भी हाई हो गया है। उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर, शनिवार को जालंधर में होने वाली अकाली बसपा गठबंधन की भूल सुधार रैली में फगवाड़ा क्षेत्र से हजारों वर्करों के काफिले जाएंगे जिसके लिए वर्करों की ड्यूटी अभी लगा दी गई हैं। इस दौरान पूर्व डिप्टी मेयर रणजीत सिंह खुराना, बसपा नेता मास्टर हरभजन सिंह बलालों, राजेंद्र सिंह चंदी, जतिंदर पलाही, सतनाम सिंह अर्शी, गुरदीप सिंह खेड़ा, बलजीत वालिया, चरणजीत सोढ़ी, गुरदावर सिंह, तजिंदर पाल सिंह परमार, बलजिंदर ठेकेदार, अवतार सिंह भूंगरनी, मोहन सिंह गांधी, संसार सिंह, गुरमीत सिंह माधोपुर, संतोख सिंह बरना, ज्ञान सिंह सरपंच दुग्ग, महेंद्र सिंह लखपुर, जोगा सिंह, शिंगारा सिंह, पूर्व पार्षद परमजीत कौर कंबोज, परमजीत सिंह भाट, धर्मेंद्र टोनी, ज्ञान सिंह चाना, गुरमीत सिंह रावलपिंडी, दविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रणजीत सिंह बब्बो उपस्थित रहे। 

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